राजस्थान

करवा चौथ आज, पतियों की लंबी उम्र के लिए पत्नियों के लिए 14 घंटे का व्रत शुरू

हिन्दुस्तान पत्रिका / जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट

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जयपुर। करवा चौथ का पर्व आज 17 अक्टूबर को देशभर में मनाया जा रहा है। महिलाएं इस इस बार 70 साल पर रोहिणी नक्षत्र के शुभ संयोग में पति की दीघार्यु की कामना करेंगी। पति की लंबी उम्र की कामना के साथ महिलाएं आज पूरे दिन निर्जला व्रत रख रही हैं और शाम को चंद्रमा निकलने पर पूजा करने के बाद अन्न जल ग्रहण करेंगी। इस व्रत में चांद को छलनी से देखने का विशेष प्रचलन है। इस साल व्रत की समयाविधि भी करीब 14 घंटे की रहेगी।

करवा चौथ व्रत और पूजा चंद्रमा केे दर्शन के साथ ही संपन्न होते हैं ऐसे में चंद्रदर्शन करना और उसका समय जानना जरूरी है। यहां आगे क्लिक कर जान सकते हैं कि आज कितने बजे चंद्रमा निकलेगा।

सुहाग और अटूट प्रेम का प्रतीक करवा चौथ इस बार बेहद खास संयोग में मनाया जाएगा। महिलाएं इस दिन मंगल व रोहिणी नक्षत्र में पति की दीघार्यु की कामना करेंगी। यह संयोग 70 साल बाद आया है।

करवाचौथ के मौके पर महिलाएं व युवतियों मेहंदी लगवाती हैं। चतुर्थी को दिनभर व्रत करने के बाद शाम को 16 श्रृंगार से सजकर चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं और भगवान गणेश की पूजा करती हैं। अप, ड्रेस और पूजा की स्टाइलिश थालियों से बाजार भरा हुआ है। इन सभी के बीच सिर्फ शादीशुदा महिलाएं ही नहीं, व्रत नहीं रख रही बल्कि कुवारी लड़कियां भी इस व्रत को रखती हैं। 

करवाचौथ पूजा में सुहाग की निशानियों का भी खास महत्व है। सुहागिनें मंगलसूत्र, सिंदूर समेत 16 श्रृंगार की निशानियों की पूजा करती हैं। सुहाग का सामान दान भी किया जाता है। उत्तरी भारत में महिलाएं कपड़े और सुहाग का सामान अपनी सांस, या जेठानी को देती हैं। इसके बाद पैर छूकर आशीर्वाद लेती हैं। इसमें मीठे करवे, पकवान कपड़े और सुहाग का सामान शामिल हैं। 

करवा चौथ का व्रत कब से शुरू हुआ इसके बारे में सही सही कोई प्रमाण नहीं मिलता। लेकिन शास्त्रों,पुराणों, महाभारत में भी करवाचौथ के महात्म्य पर कई कथाओं का वर्णन मिलता है। मान्यताओं के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने द्रौपदी को करवाचौथ की यह कथा सुनाते हुए कहा था कि पूर्ण श्रद्धा और विधि-पूर्वक इस व्रत को करने से समस्त दुख दूर हो जाते हैं और जीवन में सुख-सौभाग्य तथा धन-धान्य की प्राप्ति होने लगती है। आगे पढ़ें कुछ और भी कथाएं-

कार्तिक मास में कृष्णपक्ष चतुर्थी को करवाचौथ का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए और कुंवारी कन्याएं सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं। इस व्रत में भगवान श्रीगणेश, भगवान शिव और माता गौरी की पूजा की जाती है। माता गौरी को सिंदूर, बिंदी, चुन्नी तथा भगवान शिव को चंदन, पुष्प, वस्त्र अर्पित किए जाते हैं। भगवान शिव का परिवार सभी के लिए आदर्श माना जाता है। इस दिन चंद्रदेव की पूजा का विशेष महत्व है।

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