उदयपुर: के मेवाड़ पूर्व राजपरिवार में संपत्ति को लेकर चल रहा विवाद अब और गंभीर रूप लेता जा रहा है। पूर्व राजपरिवार के सदस्य अरविंद सिंह मेवाड़ की अंतिम वसीयत को लेकर उनकी दोनों बेटियों—भार्गवी कुमारी और पद्मजा कुमारी—द्वारा कोर्ट में पेश किए गए दस्तावेजों ने कई चौंकाने वाले सवाल खड़े कर दिए हैं।
दोनों बेटियों ने मुंबई हाईकोर्ट में दायर याचिका में दावा किया है कि उनके पिता अरविंद सिंह मेवाड़ शराब पीने के आदी थे और मानसिक रूप से इतने अस्वस्थ थे कि वे किसी भी तरह का विवेकपूर्ण निर्णय लेने की स्थिति में नहीं थे। इसी आधार पर उन्होंने पिता की अंतिम वसीयत को अवैध बताते हुए उसे चुनौती दी है।
अरविंद सिंह मेवाड़ ने अपने निधन से कुछ ही समय पहले, 7 फरवरी 2025 को वसीयत तैयार करवाई थी, जिसे सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में रजिस्टर्ड कराया गया। इस वसीयत में उन्होंने अपनी संपत्तियों का एकमात्र उत्तराधिकारी बेटे डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ को बनाया था। अरविंद सिंह का निधन 16 मार्च 2025 को हुआ था।
बहनों के आरोपों पर बेटे डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि संपत्ति के लालच में उनकी बहनों ने पिता की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। लक्ष्यराज सिंह ने बयान दिया—
“मेरी बहनों ने पिता को शराबी और मानसिक रोगी बताकर देवतुल्य पिता की छवि को धूमिल किया है। श्रीएकलिंगनाथजी ऐसे लोगों को कभी माफ नहीं करेंगे।”
लक्ष्यराज सिंह ने कोर्ट में दाखिल एफिडेविट में कहा कि उनके पिता मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ थे। उन्होंने बताया कि—
अगस्त और दिसंबर 2024 में दोनों बहनों ने कुछ कंपनियों के शेयर पिता को गिफ्ट किए थे
अरविंद सिंह मेवाड़ ने स्वयं गिफ्ट डीड पर हस्ताक्षर कर उन्हें स्वीकार किया
जनवरी 2025 में बहनों ने पिता के कहने पर चार कंपनियों के डायरेक्टर पद से इस्तीफा भी दिया था
यह सब घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि पिता उस समय पूरी तरह सक्षम और सजग थे।
भार्गवी और पद्मजा कुमारी ने पिता की स्व-अर्जित संपत्तियों में हिस्सा मांगा है, जिनमें—
शिकारबाड़ी की भूमि
मुंबई स्थित मेवाड़ हाउस के छठे माले का आधा हिस्सा
दार्जिलिया हाउस, मुंबई
सहित अन्य संपत्तियां शामिल हैं।
वसीयत से जुड़े अलग-अलग मुकदमे जोधपुर और मुंबई हाईकोर्ट में लंबित थे। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी मामलों को दिल्ली हाईकोर्ट में ट्रांसफर कर दिया है। सभी पक्षों को 12 जनवरी 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।
मेवाड़ पूर्व राजपरिवार का यह संपत्ति विवाद अब केवल कानूनी नहीं, बल्कि भावनात्मक और नैतिक मुद्दा भी बन गया है। जहां एक ओर बेटियां वसीयत को पिता की मानसिक स्थिति के आधार पर चुनौती दे रही हैं, वहीं बेटा इसे पिता की गरिमा और सम्मान पर हमला बता रहा है। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला तय करेगा कि मेवाड़ की विरासत किस दिशा में जाएगी।
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