राजस्थान: के डूंगरपुर कलेक्ट्रेट में आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक उस समय विवाद का केंद्र बन गई, जब उदयपुर से भाजपा सांसद डॉ. मन्नालाल रावत और बांसवाड़ा-डूंगरपुर से भारत आदिवासी पार्टी (BAP) सांसद राजकुमार रोत के बीच तीखी बहस हो गई। यह बहस कुछ ही देर में तू-तू, मैं-मैं और आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गई।
सोमवार सुबह हुई बैठक के दौरान पहले दोनों सांसदों के बीच शब्दों की जंग शुरू हुई। बहस बढ़ते-बढ़ते व्यक्तिगत आरोपों में बदल गई। इसी दौरान आसपुर विधायक उमेश डामोर भी विवाद में कूद पड़े और उन्होंने कथित तौर पर सांसद मन्नालाल रावत को “लड़ाई करनी है तो बाहर आ जाओ” तक कह दिया।
घटना के बाद भाजपा सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए आरोप लगाया कि—
सांसद राजकुमार रोत और विधायक उमेश डामोर ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया
थप्पड़ मारने की कोशिश की गई
जान से मारने की धमकी दी गई
बैठक को जानबूझकर बाधित कर राजनीतिक छिछोरापन किया गया
रावत ने यह भी कहा कि बीएपी नेता डूंगरपुर को अलगाववाद का टापू बनाना चाहते हैं और विकास कार्यों का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सांसद रोत ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भ्रष्ट बताया और उन पर राशन गुजरात ले जाकर बेचने का आरोप लगाया, जो महिला कार्यकर्ताओं का अपमान है।
इन आरोपों पर BAP सांसद राजकुमार रोत ने पलटवार करते हुए कहा कि—
उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत बैठक में प्री-प्लानिंग के साथ लड़ाई के इरादे से आए थे
वे हर मुद्दे पर टोकाटाकी कर रहे थे और माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे थे
BAP सांसदों ने केवल काम की गुणवत्ता, वन पट्टों की समस्या और जमीनी मुद्दों पर बात रखी थी
रोत ने कहा कि उन्होंने मर्यादित भाषा में बात की, लेकिन मन्नालाल रावत बार-बार उकसाने का काम कर रहे थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछली दिशा बैठक को रावत ने “कबाड़ा” कहा था, जिस पर आपत्ति जताई गई थी।
घटना के बाद दोनों सांसदों के बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गए हैं। भाजपा और BAP समर्थकों के बीच भी बयानबाजी तेज हो गई है। प्रशासन की ओर से फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक जांच या कार्रवाई की पुष्टि नहीं की गई है।
डूंगरपुर कलेक्ट्रेट में हुई यह झड़प न सिर्फ राजनीतिक मर्यादाओं पर सवाल खड़े करती है, बल्कि विकास से जुड़ी बैठकों की गंभीरता पर भी असर डालती है। भाजपा और BAP सांसदों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह मामला अब राजनीतिक बयानबाजी का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में यह विवाद प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर और तूल पकड़ सकता है।
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