इन ट्रेनों के कोचों पर विनाइल रैपिंग के माध्यम से बड़े ब्रांड्स के विज्ञापन लगाए जाएंगे। रेलवे का लक्ष्य इस योजना से सालाना करीब 60 लाख रुपए की अतिरिक्त आय अर्जित करना है।
सीनियर डीसीएम हितेश यादव के अनुसार, जिन ट्रेनों को चुना गया है, वे लंबी दूरी तय करती हैं और देश के प्रमुख धार्मिक, पर्यटन, शिक्षा और व्यापारिक केंद्रों को जोड़ती हैं। इसी वजह से ये विज्ञापनदाताओं के लिए बेहद आकर्षक हैं।
यह ट्रेन जोधपुर से जयपुर, आगरा और वाराणसी जैसे प्रमुख पर्यटन और तीर्थ स्थलों को जोड़ती है। इस रूट पर चलने वाली ट्रेन से विज्ञापन को विविध और बड़े पैमाने पर दर्शक मिलते हैं।
यह ट्रेन सवाई माधोपुर (रणथंभोर नेशनल पार्क) और कोटा (शिक्षा नगरी) से होकर गुजरती है। वाइल्डलाइफ टूरिस्ट और स्टूडेंट्स की भारी आवाजाही इसे ब्रांड प्रमोशन के लिए हॉट प्रॉपर्टी बनाती है।
राजस्थान के रेगिस्तान को उत्तराखंड के पहाड़ों से जोड़ने वाली यह ट्रेन तीन राज्यों—राजस्थान, हरियाणा और उत्तराखंड—से गुजरती है। यह रूट इंटर-स्टेट ब्रांडिंग के लिए खास माना जा रहा है।
शेखावाटी क्षेत्र होते हुए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक जाने वाली यह ट्रेन कॉर्पोरेट और प्रीमियम ब्रांड्स के लिए उपयुक्त मानी जा रही है।
सीनियर डीसीएम हितेश यादव ने बताया कि
रणथंभोर सुपरफास्ट एक्सप्रेस (12466/12464) के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और टेंडर जारी हो चुका है।
वहीं, मरुधर एक्सप्रेस, बाड़मेर–ऋषिकेश और जोधपुर–दिल्ली सराय रोहिल्ला ट्रेनों के लिए प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, विनाइल रैपिंग से न केवल कोचों की दिखावट बेहतर होगी, बल्कि पेंट और मेंटेनेंस पर आने वाला खर्च भी कम होगा।
इस योजना से होने वाली पूरी नॉन-फेयर रेवेन्यू आय को स्टेशन विकास, यात्री सुविधाओं के उन्नयन और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार में लगाया जाएगा।
जोधपुर मंडल की यह पहल रेलवे के लिए राजस्व बढ़ाने का नया और स्मार्ट मॉडल साबित हो सकती है। चलती ट्रेनों को मोबाइल बिलबोर्ड बनाकर जहां रेलवे अतिरिक्त कमाई करेगा, वहीं यात्रियों को बेहतर सुविधाओं का लाभ भी मिलेगा। आने वाले समय में इस मॉडल को अन्य मंडलों में भी लागू किए जाने की संभावना है।
All Rights Reserved & Copyright © 2015 By HP NEWS. Powered by Ui Systems Pvt. Ltd.