इंदौर: देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचाने जाने वाले इंदौर में दूषित पानी ने गंभीर स्वास्थ्य संकट खड़ा कर दिया है। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1400 से अधिक लोग संक्रमित या संदिग्ध पाए गए हैं। गुरुवार को 14वीं मौत की पुष्टि हुई, मृतक की पहचान अरविंद (43) पिता हीरालाल, निवासी कुलकर्णी भट्टा के रूप में हुई है।
अरविंद रविवार को काम के सिलसिले में भागीरथपुरा आया था। तबीयत बिगड़ने पर वह घर लौट गया और वहीं दवाइयां लेता रहा। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे निजी अस्पताल ले गए, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। अरविंद अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था और उसके परिवार में पत्नी व तीन बच्चे हैं।
इससे पहले 21 से 31 दिसंबर के बीच 13 लोगों की मौत हो चुकी थी।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार:
7992 घरों का सर्वे किया गया
2456 लोग संक्रमित या संदिग्ध पाए गए
200 से ज्यादा मरीज भर्ती, जिनमें से करीब 40 डिस्चार्ज
फिलहाल 162 मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं
गुरुवार सुबह मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जो भागीरथपुरा के विधायक भी हैं, स्कूटर से इलाके में पहुंचे। प्रशासन ने 7 मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपए की सहायता राशि के चेक देने की कोशिश की, लेकिन परिजनों ने मंत्री की मौजूदगी में चेक लेने से इनकार कर दिया।
महिलाओं ने गुस्से में कहा—
“हमें पैसे नहीं चाहिए, हमें हमारे लोग चाहिए। पिछले दो साल से गंदा पानी आ रहा है, शिकायत के बावजूद कुछ नहीं हुआ।”
इस दौरान महिलाओं ने मंत्री की स्कूटर को रास्ते में रोक लिया। हालात बिगड़ते देख मंत्री ने स्कूटर आगे बढ़ाने को कहा।
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के अहंकार में मंत्री ने पीड़ितों की बात नहीं सुनी।
बुधवार को एक बैठक के बाद जब मीडिया ने इलाज में खर्च की भरपाई को लेकर सवाल पूछा, तो मंत्री विजयवर्गीय ने नाराज होकर कहा—
“तुम फोकट सवाल मत पूछो।”
इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर अपशब्द भी कहे, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। हालांकि कुछ देर बाद मंत्री ने X (ट्विटर) पर पोस्ट कर अपने शब्दों पर खेद जताया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में बैठक के दौरान कहा कि ऐसी कष्टदायक स्थिति दोबारा न बने। उन्होंने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट आने के बाद दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भागीरथपुरा मामले में हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में दो जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं।
कोर्ट ने राज्य सरकार से 2 जनवरी तक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी है और सभी मरीजों का फ्री इलाज सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं।
कोर्ट ने पूछा:
कितने मरीजों का इलाज हुआ?
अब तक कितनी मौतें हुईं?
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मंत्री विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि न पीड़ितों को संवेदना मिल रही है, न ही सम्मानजनक व्यवहार।
कांग्रेस ने मामले की जांच के लिए 5 सदस्यीय समिति भी गठित की है।
इंदौर की घटना के बाद भोपाल नगर निगम भी अलर्ट मोड में आ गया है। महापौर मालती राय के निर्देश पर पानी की पाइपलाइनों की जांच शुरू की गई और कई इलाकों से पानी के सैंपल लिए गए हैं।
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से फैली बीमारी अब केवल स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और संवेदनशीलता का बड़ा सवाल बन गई है। मौतों का बढ़ता आंकड़ा, लोगों का गुस्सा और राजनीतिक बयानबाजी इस बात का संकेत है कि समस्या की जड़ तक पहुंचकर ठोस समाधान जरूरी है। हाईकोर्ट की सख्ती और जांच रिपोर्ट के बाद ही यह तय होगा कि इस त्रासदी का जिम्मेदार कौन है।
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