जयपुर: राजस्थान ने कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा क्रांति लाकर देशभर में बाजी मार ली है। PM-KUSUM योजना (कम्पोनेंट-सी) के तहत किसानों को दिन में बिजली देने के लिए राजस्थान को गोल्ड अवॉर्ड से नवाजा गया है। यह सम्मान बुधवार को दिल्ली के स्कोप ऑडिटोरियम में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल द्वारा राजस्थान डिस्कॉम्स की चेयरमैन आरती डोगरा को प्रदान किया गया।
इस योजना के तहत पहले किसानों को खेतों में पानी देने के लिए रात का इंतजार करना पड़ता था। ठंडी रातों में खेतों में सिंचाई करना बेहद कठिन और जोखिम भरा होता था। लेकिन अब राजस्थान के 22 जिलों में कृषि फीडर्स को सौर ऊर्जा से जोड़ दिया गया है।
इससे 1,41,589 किसान सीधे लाभान्वित हो रहे हैं और वे दिन में ही भरपूर बिजली से सिंचाई कर पा रहे हैं।
अवार्ड ग्रहण करने के बाद आरती डोगरा ने NDTV से कहा,
"हमने मैक्सिमम कुसुम फीडर्स का सोलराइजेशन किया है। इसका लाभ 1 लाख से ज्यादा किसानों को मिल रहा है। अब किसान दिन में ही सौर ऊर्जा से अपनी फसल की सिंचाई कर रहे हैं। यह सरकार और किसानों दोनों के लिए गर्व की बात है।"
राजस्थान में अब तक कुल 1307 सोलर प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं, जिनकी कुल क्षमता 2877 मेगावाट है। विशेष रूप से फीडर सोलराइजेशन के तहत 899 प्लांट 2333 मेगावाट क्षमता के साथ काम कर रहे हैं।
इन प्रयासों का सीधा नतीजा है कि प्रदेश के 1,41,589 किसान सीधे तौर पर इस योजना से लाभांवित हो रहे हैं।
ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने जयपुर, जोधपुर और अजमेर डिस्कॉम की टीमों को बधाई देते हुए कहा,
"मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के विजन के अनुसार राजस्थान जल्द ही 'एनर्जी सरप्लस' स्टेट बनेगा। इस साल के अंत तक सौर ऊर्जा क्षमता को 5018 मेगावाट तक ले जाने का लक्ष्य है, जिससे 3.62 लाख किसान लाभांवित होंगे।"
राजस्थान ने PM-KUSUM योजना में देश में नंबर-1 बनकर साबित कर दिया है कि कृषि और ऊर्जा क्षेत्र में सौर तकनीक का सही इस्तेमाल किसानों की ज़िंदगी बदल सकता है। अब दिन में बिजली मिलने से किसानों को रातभर जागकर सिंचाई करने की जरूरत नहीं, और प्रदेश सौर ऊर्जा के क्षेत्र में राष्ट्रीय मानक स्थापित कर रहा है।
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