राजस्थान: में कृषि विभाग की योजनाएं किसानों तक कितनी पहुंच रही हैं, इसकी सच्चाई गुरुवार को दौसा में सबके सामने आ गई। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने जब मंच से किसानों से सीधा सवाल किया—
“बताइए, विभाग की योजनाओं का आपको लाभ मिल रहा है क्या?”
तो सभा में सन्नाटा छा गया।
मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत पांचवीं किस्त वितरण कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने जब योजनाओं को लेकर फीडबैक मांगा, तो सैकड़ों किसानों में से सिर्फ दो लोगों ने ही हाथ उठाया। बाकी किसानों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
इस पर मंत्री ने मंच से ही अधिकारियों को टोकते हुए कहा—
“इसका मतलब साफ है कि आप लोगों तक जानकारी ही नहीं पहुंचा पा रहे।”
मंत्री ने सीधे कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि योजनाओं की जानकारी ज़मीनी स्तर तक नहीं पहुंच रही।
इस दौरान सहायक निदेशक कृषि (विस्तार) अशोक मीणा किसानों को हाथ उठाने का इशारा करते रहे। बाद में उन्होंने मंत्री से कहा—
“ये लोग आपका सवाल समझ नहीं पाए।”
इस जवाब ने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े कर दिए।
कार्यक्रम में कलेक्टर देवेन्द्र कुमार ने कृषि मंत्री को पौधा भेंट कर स्वागत किया। बड़ी संख्या में किसान और विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में कृषि मंत्री ने फर्जी ओएमआर शीट घोटाले और पेपर लीक को लेकर बड़ा बयान दिया।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद डोटासरा के बयान पर पलटवार करते हुए मंत्री ने कहा—
“डोटासरा के परिवार और रिश्तेदारी के 6 लोग आरएएस बन गए। अगर जांच उधर गई तो 2 दिन में पता नहीं लगेगा और वे जेल के सीखचों में होंगे।”
किरोड़ीलाल मीणा ने कहा कि उन्होंने पिछली सरकार के समय भी खाली ओएमआर शीट मीडिया के सामने रखी थी, जिनमें—
अयोग्य उम्मीदवारों को नंबर दिए गए
योग्य अभ्यर्थियों को फेल किया गया
उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार में ही एक दर्जन आरएएस परीक्षाओं की ओएमआर शीट एसओजी को जांच के लिए दी गई हैं।
कृषि मंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि ओएमआर शीट मामले में—
कांग्रेस के बड़े नेता
आरपीएससी चेयरमैन और सदस्य
गोपनीय शाखा के अधिकारी-कर्मचारी
और माफिया
सबके नाम सामने आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि बेरोजगारों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई करेगी।
कार्यक्रम में कई किसान अपनी समस्याएं और शिकायतें लेकर पहुंचे। मंत्री ने मौके पर ही उनकी सुनवाई की और संबंधित अधिकारियों को निस्तारण के निर्देश दिए।
दौसा में हुए इस कार्यक्रम ने साफ कर दिया कि कृषि विभाग की योजनाओं और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर है। किसानों की चुप्पी और अधिकारियों के जवाब ने सिस्टम की कमजोर कड़ी उजागर कर दी। वहीं, ओएमआर शीट घोटाले को लेकर कृषि मंत्री के तीखे बयान से राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
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