नई दिल्ली। भारत सरकार ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कार 2026 का औपचारिक ऐलान कर दिया है। देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री के लिए इस वर्ष कुल 45 नामों की सूची सामने आई है। इस बार पद्म पुरस्कारों में उन गुमनाम नायकों को विशेष स्थान दिया गया है, जिन्होंने वर्षों तक बिना किसी प्रचार के समाज सेवा को अपना जीवन बना लिया।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, पद्म पुरस्कार 2026 की सूची में भारत के अलग-अलग राज्यों से आए ऐसे लोग शामिल हैं, जिन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा, साहित्य, समाज सेवा, महिला सशक्तिकरण, दिव्यांग कल्याण, स्वच्छता और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
गुमनाम नायकों की श्रेणी में विशेष सम्मान
इस वर्ष पद्म पुरस्कारों में गुमनाम नायकों की श्रेणी विशेष रूप से चर्चा में है। मध्य प्रदेश के भगवादास रायकवार और जम्मू-कश्मीर के बृज लाल भट को उनके आजीवन समाजसेवा के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश से चिरंजी लाल यादव और गुजरात से धार्मिकलाल चुन्नीलाल पंड्या का नाम भी इसी श्रेणी में शामिल किया गया है। इन सभी ने समाज के हाशिए पर खड़े वर्गों के उत्थान के लिए दशकों तक काम किया है।
साहित्य और शिक्षा में अंके गौड़ा को सम्मान
कर्नाटक के अंके गौड़ा को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्मश्री 2026 से सम्मानित किया जाएगा। वहीं, महाराष्ट्र की अरमिडा फर्नांडिस को भी गुमनाम नायकों की श्रेणी में पद्मश्री से नवाजा जाएगा।
इसके अलावा, छत्तीसगढ़ की बुदरी थाटी और ओडिशा के चरण हेम्ब्रम को भी पद्मश्री सम्मान दिए जाने की घोषणा की गई है।
देश के कोने-कोने से चुने गए सम्मानित
इस वर्ष के पद्म पुरस्कारों की खास बात यह है कि सम्मान पाने वालों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जो पिछड़े और दलित समुदायों, आदिम जनजातियों और देश के दूरदराज व दुर्गम इलाकों से आते हैं। इन लोगों ने महिलाओं, बच्चों, दलितों, आदिवासियों और दिव्यांगजनों की सेवा में अपना पूरा जीवन समर्पित किया है।
सरकार के अनुसार, इन विभूतियों का चयन उनके निस्वार्थ योगदान और समाज पर पड़े सकारात्मक प्रभाव के आधार पर किया गया है, ताकि ऐसे लोगों को पहचान मिल सके जो वर्षों तक गुमनाम रहकर राष्ट्र निर्माण में जुटे रहे।
निष्कर्ष:
Padma Awards 2026 की घोषणा यह संदेश देती है कि देश केवल चर्चित नामों को ही नहीं, बल्कि उन गुमनाम नायकों को भी सम्मानित कर रहा है जिन्होंने बिना किसी अपेक्षा के समाज की सेवा की। इस बार की सूची सामाजिक समावेशन, जमीनी कार्य और वास्तविक बदलाव लाने वाले प्रयासों को राष्ट्रीय पहचान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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