नई दिल्ली | Republic Day 2026 Parade भारत के इतिहास में एक बार फिर यादगार बन गई। देश आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है और राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित मुख्य समारोह में भारत की सैन्य शक्ति, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक विरासत का भव्य प्रदर्शन देखने को मिला।
इस वर्ष की गणतंत्र दिवस परेड कई मायनों में खास रही, क्योंकि इसमें कई ऐसे प्रयोग और प्रस्तुतियां देखने को मिलीं, जो पहली बार आयोजित की गईं। सैन्य परेड और सांस्कृतिक झांकियों के माध्यम से भारत ने न केवल अपनी रक्षा क्षमता दिखाई, बल्कि दुनिया को यह संदेश भी दिया कि आत्मनिर्भर भारत अब एक सशक्त वास्तविकता बन चुका है।
इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह में दो विदेशी मेहमान बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए।
उर्सुला वॉन डेर लेयेन, अध्यक्ष – यूरोपीय आयोग
सैंटोस डा कोस्टा, अध्यक्ष – यूरोपीय परिषद
भारत और यूरोपीय संघ के बीच संभावित व्यापार समझौते के दृष्टिकोण से यह उपस्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। परंपरा के अनुसार, यूरोपीय यूनियन का सैन्य दल भी परेड में शामिल हुआ, जिसमें चार ध्वजवाहक जवान नजर आए।
Republic Day 2026 Parade का सबसे बड़ा आकर्षण रहा तीनों सेनाओं की संयुक्त झांकी।
इस झांकी की थीम थी—
“ऑपरेशन सिंदूर: संयुक्तता के माध्यम से विजय”
यह झांकी भारतीय सेना के थिएटर कमांड सिस्टम को दर्शाती है, जिसके तहत थलसेना, नौसेना और वायुसेना एकीकृत कमांड के अंतर्गत मिलकर अभियान चलाती हैं। ऑपरेशन सिंदूर में इसी समन्वय ने भारत को निर्णायक विजय दिलाई थी। इस प्रस्तुति ने भारत की आधुनिक सैन्य रणनीति और बढ़ी हुई मारक क्षमता को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया।
इस वर्ष परेड में पहली बार बैटर एरे फॉर्मेट में हथियारों का प्रदर्शन किया गया। यानी हथियारों को उसी क्रम में प्रदर्शित किया गया, जैसे वे वास्तविक युद्ध में उपयोग किए जाते हैं। यह प्रस्तुति सैन्य विशेषज्ञों और दर्शकों दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र रही।
कर्तव्य पथ पर मेक इन इंडिया की ताकत साफ दिखाई दी। परेड में शामिल प्रमुख स्वदेशी हथियारों में शामिल रहे—
ध्रुव हेलीकॉप्टर
रुद्र प्रहार
युद्धक टैंक: भीष्म और अर्जुन
गन सिस्टम: धनुष, अमोघ
आकाश वेपन सिस्टम
इन सभी ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अब रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा चुका है।
इस साल की परेड में नारी शक्ति पर विशेष फोकस रहा।
सीआरपीएफ की टुकड़ी का नेतृत्व महिला अधिकारी सिमरन बाला ने किया, जो 140 से अधिक पुरुष जवानों की टुकड़ी का नेतृत्व करने वाली पहली महिला अधिकारी बनीं।
इसके साथ ही पहली बार भारतीय सेना के पशु दस्ते ने भी मार्च किया। इस अनोखे दस्ते में बैक्ट्रियन ऊंट, स्वान और बाज शामिल रहे, जिन्हें “मूक योद्धा” कहा जाता है।
इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह के केंद्र में ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने की थीम रही।
मंत्रालयों की झांकियों
मंच सजावट
आमंत्रण पत्र
सबमें इसी थीम की झलक दिखी। प्रसिद्ध कलाकार तेजेंद्र कुमार मित्रा की पेंटिंग्स भी प्रदर्शित की गईं।
समारोह में 10,000 विशेष आमंत्रित अतिथि शामिल हुए, जिनमें इनोवेटर, रिसर्चर, स्वयं सहायता समूह और सरकारी योजनाओं में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोग शामिल थे।
सुरक्षा व्यवस्था भी इस बार हाई-टेक रही। पहली बार AI से लैस स्मार्ट चश्मे पहने सुरक्षाकर्मी नजर आए।
इसके अलावा, दर्शक दीर्घाओं को VVIP जैसे शब्दों की बजाय भारत की नदियों के नाम दिए गए—गंगा, यमुना, नर्मदा, ब्रह्मपुत्र, कावेरी सहित कुल 20 से अधिक नदियों के नाम।
Republic Day 2026 Parade ने यह साबित कर दिया कि भारत न केवल सैन्य रूप से सशक्त है, बल्कि विचार, संस्कृति, तकनीक और समावेशिता में भी अग्रणी बनता जा रहा है। तीनों सेनाओं की संयुक्त झांकी, स्वदेशी हथियार, नारी शक्ति और मूक योद्धाओं का मार्च—इन सबने मिलकर 77वें गणतंत्र दिवस को ऐतिहासिक बना दिया।
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