दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे पर हॉरर: ट्रक ने 12 KM तक घसीटी कार, 4 की मौत; बचे यात्री ने 45 मिनट कॉल किया, कोई मदद नहीं आई

दौसा। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे पर एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ। उज्जैन महाकाल के दर्शन कर लौट रहे 5 श्रद्धालुओं की कार ट्रक में फंसकर करीब 12 किलोमीटर तक घसीटती रही, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई। केवल पीछे की सीट पर बैठे बृजमोहन गुप्ता ही बच सके।


बृजमोहन की जुबानी कहानी

बृजमोहन ने दैनिक संवाददाताओं को बताया कि वे 24 जनवरी को एक्सप्रेस वे के जरिए उज्जैन के लिए रवाना हुए थे। दर्शन के बाद 26 जनवरी की शाम को वापस लौटते समय 27 जनवरी सुबह करीब 5:30 बजे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे पर हादसा हुआ।

“मैं पीछे की सीट पर लेटा हुआ था। जब मेरी आंख खुली, तो कार ट्रक में फंसी हुई थी। आगे बैठे मेरे जीजा राहुल गुप्ता, प्रिंस, पारस और ड्राइवर विक्रम की मौत हो चुकी थी। मैंने करीब 45 मिनट तक 112 नंबर पर कॉल किया, मदद के लिए चिल्लाया, लेकिन कोई नहीं आया।”

बृजमोहन ने बताया कि एक ब्रेकर या ऊंचाई/नीचाई वाले हिस्से पर कार ट्रक से अलग हुई और सड़क किनारे जाकर रुकी। इसके बाद आसपास के ग्रामीण आए और शीशा तोड़कर उसे बाहर निकाला।


पुलिस और थानों की रिपोर्ट

  • पापड़दा थाना ASI नेमीचंद: कार पिलर नंबर 193 के पास डैमेज हालत में मिली।

  • राहुवास थाना इंचार्ज गोपाल शर्मा:
    मृतकों में शामिल हैं—

    • राहुल गुप्ता (35), प्रिंस गुप्ता (18), पारस अग्रवाल (31) और ड्राइवर विक्रम सिंह (25)।
      बृजमोहन गुप्ता ही अकेले बचे।


हाईवे की सुरक्षा व्यवस्था भी फेल

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे पर भांडारेज इंटरचेंज पर अलग-अलग कंपनियों के पेट्रोलिंग वाहन और सीसीटीवी मॉनिटरिंग के बावजूद हादसे का पता नहीं चला। हादसे के समय कार ट्रक में फंसकर लंबी दूरी तक घसीटती रही।


चश्मदीदों का बयान

बृजमोहन ने बताया कि जैसे ही कार ब्रेकर पर रुकी, उन्होंने आसपास चिल्लाया और ग्रामीणों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया।

“अगर ग्रामीण मदद नहीं करते, तो शायद मैं भी नहीं बच पाता। चारों यात्री वहीं मर चुके थे। मैंने जिन्दा रहने के लिए अपनी पूरी ताकत लगाई।”


सड़क सुरक्षा पर उठ रहे सवाल

इस हादसे ने दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे की सुरक्षा व्यवस्था और 112 हेल्पलाइन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। बृजमोहन की 45 मिनट की कॉल और देर से बचाव ने लोगों में चिंता बढ़ा दी है।


निष्कर्ष

दौसा एक्सप्रेस वे हादसा न केवल चार मासूमों की जान लेने वाला हादसा है, बल्कि यह सड़क सुरक्षा, हाईवे मॉनिटरिंग और आपातकालीन सहायता प्रणाली की गंभीर चूक को उजागर करता है। अब सवाल यह है कि जिम्मेदार संस्थान कब तक ऐसे हादसों से सबक लेंगे और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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