नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की फरवरी मौद्रिक नीति समिति (MPC) बैठक में भले ही ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया हो, लेकिन ग्राहक संरक्षण, एमएसएमई और वित्तीय सुधारों को लेकर केंद्रीय बैंक ने बड़ा कदम उठाया है। आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25% पर यथावत रखते हुए साफ संकेत दिया है कि फिलहाल प्राथमिकता आर्थिक स्थिरता के साथ सुधारों को तेज करने की है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने नीति की घोषणा करते हुए कहा कि बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली मजबूत बनी हुई है और अब फोकस आम ग्राहकों और छोटे कारोबारियों को राहत देने पर है।
डिजिटल फ्रॉड की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए आरबीआई ने बड़ा ऐलान किया है।
केंद्रीय बैंक ने छोटे मूल्य की डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में ग्राहकों को 25,000 रुपये तक मुआवजा देने के लिए एक ढांचा प्रस्तावित किया है। यह राहत फौरी सहायता के रूप में एक बार दी जाएगी।
इसके साथ ही RBI ने:
गलत वित्तीय उत्पादों की बिक्री रोकने
ऋण वसूली और रिकवरी एजेंटों पर सख्ती
अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन में ग्राहक देयता सीमित करने
से जुड़े तीन मसौदा दिशानिर्देश लाने की घोषणा की है।
डिजिटल भुगतान सुरक्षा बढ़ाने के लिए एक डिस्कशन पेपर भी जल्द जारी होगा, जिसमें वरिष्ठ नागरिकों जैसे कमजोर उपभोक्ताओं के लिए अतिरिक्त प्रमाणीकरण और विलंबित क्रेडिट जैसे उपाय शामिल हो सकते हैं।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को बढ़ावा देने के लिए RBI ने बड़ा कदम उठाया है।
बिना गारंटी वाले ऋण की सीमा को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने का प्रस्ताव दिया गया है। इससे छोटे कारोबारियों को पूंजी की उपलब्धता आसान होगी और रोजगार सृजन को बल मिलेगा।
रियल एस्टेट सेक्टर को गति देने के लिए बैंकों को REITs (रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट) को ऋण देने की अनुमति दी जाएगी, हालांकि यह विवेकपूर्ण सुरक्षा मानकों के अधीन होगा।
इसके अलावा, कुछ गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के लिए अनुपालन बोझ कम करने की भी घोषणा की गई है।
जिन NBFCs के पास:
सार्वजनिक धन नहीं
ग्राहक संपर्क नहीं
और जिनकी संपत्ति 1,000 करोड़ रुपये से कम है
उन्हें पंजीकरण की अनिवार्यता से छूट देने का प्रस्ताव रखा गया है।
RBI ने लीड बैंक योजना (LBS), किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट (BC) मॉडल जैसी योजनाओं की समीक्षा की है।
इन योजनाओं को और प्रभावी बनाने के लिए संशोधित दिशा-निर्देशों का मसौदा जल्द जारी किया जाएगा।
RBI MPC की यह नीति भले ही ब्याज दरों में बदलाव न लेकर आई हो, लेकिन डिजिटल सुरक्षा, एमएसएमई ऋण, रियल एस्टेट और ग्राहक संरक्षण के मोर्चे पर इसे एक मजबूत सुधारात्मक नीति माना जा रहा है। यह साफ संकेत है कि RBI अब स्थिरता के साथ-साथ समावेशी विकास और भरोसेमंद बैंकिंग प्रणाली पर जोर दे रहा है।
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