जोधपुर: शहर में साइबर ठगी का बड़ा मामला सामने आया है, जहां 77 वर्षीय बुजुर्ग को ‘RTO ई-चालान’ के नाम पर भेजी गई एक APK फाइल के जरिए 18.60 लाख रुपए की ठगी का शिकार बना लिया गया। मामला Chopasni Housing Board थाना क्षेत्र का है। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सेक्टर 17E निवासी कमल चंद लुंकड़ ने पुलिस को बताया कि उनके मोबाइल पर ‘RTO ई-चालान’ नाम से एक फाइल आई, जो अपने आप डाउनलोड हो गई। यह फाइल दरअसल एक APK (एंड्रॉयड एप्लिकेशन पैकेज) थी, जिसके जरिए ठगों ने उनके मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग तक पहुंच बना ली।
कुछ ही समय में उनके बैंक खाते से लाखों रुपए ट्रांसफर कर लिए गए।
9 फरवरी को कमल चंद को सूचना मिली कि उनकी बहन की तबीयत खराब है। 10 फरवरी की सुबह वे पत्नी के साथ जयपुर रवाना हो गए। इसी दौरान साइबर ठगों ने मौका पाकर दो दिनों में बड़े-बड़े ट्रांजेक्शन कर डाले।
10 फरवरी को निकाली गई रकम:
5 लाख रुपए
4 लाख रुपए
1 लाख रुपए
11 फरवरी को निकाली गई रकम:
5 लाख रुपए
3.60 लाख रुपए
कुल मिलाकर 18.60 लाख रुपए खाते से साफ कर दिए गए।
पीड़ित अस्पताल में व्यस्त थे, इसलिए मोबाइल पर आने वाले बैंक मैसेज और अलर्ट्स पर ध्यान नहीं दे सके।
11 फरवरी की रात जोधपुर लौटने के बाद 12 फरवरी को जब उन्होंने ईमेल चेक किया, तब खाते से पैसे निकलने की जानकारी मिली। इसके बाद तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई गई।
पुलिस ने मामला दर्ज कर डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच शुरू कर दी है।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि APK फाइलें सीधे फोन में इंस्टॉल होकर रिमोट एक्सेस दे सकती हैं। इससे ठग OTP, बैंक डिटेल्स और अन्य निजी जानकारी हासिल कर लेते हैं।
“किसी भी अनजान लिंक या फाइल को डाउनलोड न करें, खासकर यदि वह बैंक, RTO या सरकारी संस्था के नाम पर हो।” – साइबर विशेषज्ञ
जोधपुर की यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि साइबर ठग अब वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। ‘RTO ई-चालान’ जैसे नामों से भेजी गई फाइलें दरअसल जाल होती हैं।
सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है—अनजान APK फाइल डाउनलोड न करें, बैंक अलर्ट्स तुरंत चेक करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
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