Mohan Bhagwat Lucknow Statement: ने एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंगलवार को लखनऊ में कहा कि भारत में रहने वाले मुस्लिम भी हिंदू हैं और वे किसी अरब देश से नहीं आए हैं। उन्होंने ‘घर वापसी’ अभियान को तेज करने की बात भी कही।
भागवत 17 और 18 फरवरी को लखनऊ दौरे पर हैं। पहले दिन उन्होंने निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में सामाजिक सद्भाव बैठक को संबोधित किया।
संघ प्रमुख ने कहा कि जो लोग हिंदू धर्म में वापस लौटते हैं, उनका ध्यान रखना भी समाज की जिम्मेदारी है।
उन्होंने बढ़ती घुसपैठ पर चिंता जताते हुए कहा— घुसपैठियों को “डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट” करना होगा और उन्हें रोजगार नहीं देना चाहिए।
हिंदुओं की घटती जनसंख्या दर पर भागवत ने कहा कि औसत जनसंख्या दर 2.1 है, जबकि कम से कम तीन बच्चे होने चाहिए।
उन्होंने कहा— जिस समाज में औसतन तीन से कम बच्चे होते हैं, वह समाज भविष्य में समाप्त हो जाता है।
उन्होंने नवविवाहित दंपतियों से अपील की कि कम से कम तीन बच्चे पैदा करें।
UGC गाइडलाइंस पर भागवत ने कहा कि कानून सभी को मानना चाहिए। अगर कोई कानून गलत लगता है तो उसे बदलने का संवैधानिक उपाय भी है।
उन्होंने कहा कि किसी नियम को जातीय संघर्ष का कारण नहीं बनाना चाहिए। समाज में अपनेपन का भाव होगा तो विवाद नहीं होंगे।
भागवत ने समाज में बढ़ती जातीय विषमता पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि 500 साल मुगल शासन और 200 साल अंग्रेजी शासन के बाद भी हिंदू संस्कृति को मिटाया नहीं जा सका।
उन्होंने लोगों से अपील की कि जाति के आधार पर भेदभाव समाप्त करें और समाज के कमजोर वर्गों को आगे बढ़ाने का प्रयास करें।
संघ प्रमुख ने कहा कि अमेरिका और चीन जैसे देशों में बैठे कुछ लोग भारत की सद्भावना के खिलाफ योजनाएं बना रहे हैं।
उन्होंने समाज को आपसी अविश्वास खत्म करने और एक-दूसरे के दुख-दर्द में सहभागी बनने की सलाह दी।
भागवत ने कहा कि परिवार का आधार मातृशक्ति है। उन्होंने महिलाओं को अबला नहीं बल्कि शक्तिशाली बताया और आत्मरक्षा प्रशिक्षण की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में महिला को माता का दर्जा दिया गया है।
बैठक में पूछे गए सवाल पर भागवत ने कहा कि मुस्लिम समाज के लोग भी संघ से जुड़ना चाहते हैं, इसलिए मुस्लिम मंच का गठन हुआ।
कार्यक्रम में सिख, बौद्ध, जैन समाज के प्रतिनिधियों के साथ रामकृष्ण मिशन, इस्कॉन, आर्ट ऑफ लिविंग सहित कई धार्मिक-सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
13 दिसंबर: अंडमान में कहा— भारत के लिए जीने का समय है, मरने का नहीं।
1 दिसंबर, पुणे: भारत को विश्व में उचित स्थान मिल रहा है।
18 नवंबर, गुवाहाटी: भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की जरूरत नहीं।
लखनऊ प्रवास के दौरान मोहन भागवत ने जनसंख्या, घुसपैठ, UGC गाइडलाइंस, जातिवाद और सामाजिक सद्भाव जैसे कई मुद्दों पर स्पष्ट राय रखी। उनके ‘तीन बच्चे’ वाले बयान और ‘भारतीय मुसलमान भी हिंदू’ टिप्पणी पर देशभर में चर्चा होना तय है।
अब निगाहें 18 फरवरी को होने वाले उनके युवा संवाद और प्रबुद्ध जन गोष्ठी संबोधन पर टिकी हैं, जहां वे और महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी बात रख सकते हैं।
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