‘देश के विकास में सबसे बड़ा रोड़ा है RSS’, मानहानि नोटिस पर बोले प्रियांक खरगे, संगठन की फंडिंग पर उठाए सवाल

बेंगलुरु। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर दिए गए बयानों के कारण कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे और कांग्रेस नेता एक बार फिर सियासी तूफान के केंद्र में आ गए हैं। मानहानि मामले में विशेष अदालत द्वारा नोटिस जारी होने के बाद प्रियांक खरगे ने आरएसएस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “देश के विकास में सबसे बड़ा रोड़ा RSS है।”

मंगलवार को प्रियांक खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक अखबार की खबर साझा की, जिसमें बताया गया था कि एक आरएसएस सदस्य द्वारा दायर मानहानि शिकायत पर अदालत ने उन्हें और कर्नाटक सरकार के मंत्री दिनेश गुंडू राव को नोटिस जारी किया है।


‘कठपुतलियों के ज़रिए दर्ज कराए जा रहे केस’

प्रियांक खरगे ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ दर्ज कराए जा रहे मामले आरएसएस से जुड़े सवालों की प्रतिक्रिया हैं। उन्होंने कहा—

“कुछ चुनिंदा लोग अपनी कठपुतलियों का इस्तेमाल कर हमारे खिलाफ केस दर्ज करवा रहे हैं, सिर्फ इसलिए क्योंकि हम RSS से पारदर्शिता और जवाबदेही के सवाल पूछ रहे हैं।”

उन्होंने साफ कहा कि ऐसे मामलों से वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।


RSS की फंडिंग पर सीधे सवाल

प्रियांक खरगे ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि संगठन स्वयंसेवकों के चंदे से चलता है। इस पर सवाल उठाते हुए खरगे ने पूछा—

  • RSS के स्वयंसेवक कौन हैं और उनकी पहचान कैसे तय होती है?

  • चंदा किस पैमाने पर और किन माध्यमों से लिया जाता है?

  • अगर संगठन पारदर्शी है, तो दान उसकी अपनी पंजीकृत पहचान के तहत क्यों नहीं लिया जाता?

  • पूर्णकालिक प्रचारकों को वेतन कौन देता है?

  • बड़े स्तर के आयोजनों और अभियानों का खर्च कहां से आता है?


पंजीकरण और जवाबदेही पर सवाल

कांग्रेस मंत्री ने यह भी पूछा कि—

  • RSS अब तक पंजीकृत संस्था क्यों नहीं है?

  • जब देश की हर धार्मिक और सामाजिक संस्था को वित्तीय पारदर्शिता का पालन करना पड़ता है, तो RSS को इससे छूट क्यों?

  • स्थानीय कार्यालयों, वर्दी और अन्य संसाधनों का खर्च किस मद से होता है और उसका हिसाब कहां रखा जाता है?

उन्होंने कहा कि ये सवाल देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और जवाबदेही से जुड़े हैं, न कि किसी व्यक्तिगत दुश्मनी से।


पहले भी RSS पर प्रतिबंध की मांग कर चुके हैं

गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में प्रियांक खरगे ने सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और राज्य के स्वामित्व वाले मंदिरों में RSS की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि सरकारी संस्थानों में पाठ्यक्रम से इतर किसी भी संगठन की गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।


निष्कर्ष:

प्रियांक खरगे के RSS को लेकर दिए गए बयानों ने एक बार फिर राजनीति को गरमा दिया है। मानहानि नोटिस के बावजूद उन्होंने संगठन की फंडिंग, पंजीकरण और पारदर्शिता पर सीधे सवाल उठाकर साफ कर दिया है कि यह विवाद अब सिर्फ बयानबाज़ी नहीं, बल्कि कानूनी और वैचारिक टकराव की दिशा में बढ़ चुका है। आने वाले दिनों में यह मामला राष्ट्रीय राजनीति में और तूल पकड़ सकता है।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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