जयपुर। राजस्थान की राजनीति में इन दिनों सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना यानी MPLADS को लेकर जबरदस्त सियासी घमासान मचा हुआ है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस के तीन सांसदों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने अपने सांसद कोष की राशि दूसरे राज्यों में खर्च की, जिससे प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है।
इस विवाद की शुरुआत सोमवार, 5 जनवरी को हुई, जब बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आरोप लगाया कि राजस्थान के तीन कांग्रेस सांसद—
संजना जाटव (भरतपुर)
राहुल कस्वां (चूरू)
बृजेंद्र सिंह ओला (झुंझुनूं)
ने MPLADS की राशि अपने संसदीय क्षेत्र के बाहर खर्च की है।
अमित मालवीय के आरोपों को राजस्थान के गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने भी समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सांसदों ने यह राशि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को खुश करने के लिए हरियाणा के कैथल विधानसभा क्षेत्र में खर्च की, जो कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला के बेटे आदित्य सुरजेवाला का क्षेत्र है।
इसके बाद मामला सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि पूरी तरह राजनीतिक बन गया।
आरोपों के जवाब में तीनों कांग्रेस सांसदों ने कहा कि उन्होंने जो भी सिफारिशें की हैं, वे पूरी तरह नियमों के तहत हैं।
भरतपुर से सांसद संजना जाटव ने पलटवार करते हुए कहा कि राजस्थान से बीजेपी के सांसद भी दूसरे राज्यों में MPLADS का पैसा खर्च कर चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि:
राज्यसभा सांसद और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने पंजाब में
सांसद राजेंद्र गहलोत और चुन्नीलाल गरासिया ने उत्तर प्रदेश में
सांसद निधि से विकास कार्यों की सिफारिश की है।
सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) केंद्र सरकार की एक प्रमुख योजना है, जिसकी शुरुआत 1993 में की गई थी। इसका उद्देश्य सांसदों को अपने क्षेत्र में स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास कार्य कराने की सुविधा देना है।
लोकसभा सांसद: अपने संसदीय क्षेत्र में
राज्यसभा सांसद: जिस राज्य से निर्वाचित हुए हैं, वहां
मनोनीत सांसद: देश के किसी भी राज्य में
सांसद विकास कार्य की सिफारिश करते हैं
प्रस्ताव जिला प्रशासन (कलेक्टर/डीएम) को भेजा जाता है
जिला स्तर पर मंजूरी और क्रियान्वयन होता है
निगरानी राज्य सरकार के संबंधित विभाग द्वारा की जाती है
वर्ष 2011-12 से हर सांसद को 5 करोड़ रुपए प्रति वर्ष
यह राशि 2.5 करोड़ की दो किस्तों में मिलती है
अगर पूरा पैसा खर्च न हो, तो वह अगले वर्ष में जुड़ जाता है
यही इस पूरे विवाद की जड़ है।
नियमों के अनुसार:
सांसद अपने क्षेत्र से बाहर प्रति वर्ष 25 लाख रुपए तक खर्च कर सकते थे
लेकिन अगस्त 2024 में हुए संशोधन के बाद यह सीमा बढ़ाकर
50 लाख रुपए प्रति वर्ष कर दी गई है
इसके अलावा:
गंभीर प्राकृतिक आपदा की स्थिति में
सांसद देश में कहीं भी 1 करोड़ रुपए तक खर्च करने की सिफारिश कर सकते हैं
राजस्थान में MPLADS स्कीम को लेकर उठा यह विवाद तकनीकी नियमों से कहीं आगे निकल चुका है। जहां बीजेपी इसे राजनीतिक नैतिकता का मुद्दा बना रही है, वहीं कांग्रेस नियमों और संशोधन का हवाला देकर खुद को सही ठहरा रही है। साफ है कि सांसद निधि का यह मामला आने वाले दिनों में राजस्थान की राजनीति में और ज्यादा गरमाहट लाने वाला है।
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