जोधपुर के SN मेडिकल कॉलेज में साल का पहला देहदान: महिला की आंखें भी की डोनेट, परिवार बोला- दाहसंस्कार से मोक्ष, देहदान से दोहरा मोक्ष

जोधपुर: मानवीय संवेदना, समाज सेवा और चिकित्सा शिक्षा के प्रति समर्पण की एक प्रेरणादायक मिसाल जोधपुर के एसएन मेडिकल कॉलेज में देखने को मिली। पाली निवासी 40 वर्षीय महिला नीता कोका के निधन के बाद उनके परिजनों ने न केवल नेत्रदान, बल्कि देहदान भी कर इस साल का पहला देहदान किया।

परिजनों ने कहा कि “हिंदू धर्म में दाहसंस्कार से मोक्ष मिलता है, लेकिन देहदान से दोहरा मोक्ष प्राप्त होता है।” उनका मानना है कि इस निर्णय से हजारों मेडिकल छात्र और शोधार्थी डॉक्टर लाभान्वित होंगे।


40 दिन वेंटिलेटर पर रहीं, 8 जनवरी को हुआ निधन

पाली निवासी नीता कोका का 8 जनवरी को जोधपुर के एमडीएम अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया था। वे करीब 40 दिनों से वेंटिलेटर पर भर्ती थीं। निधन के बाद परिजनों ने पहले नेत्रदान कराया, जिसमें राजेंद्र ने अहम भूमिका निभाई।

इसके बाद 9 जनवरी को परिवार की सर्वसम्मति से एसएन मेडिकल कॉलेज में देहदान किया गया।


पूरे परिवार की सहमति से लिया गया निर्णय

देहदान के समय महिला के पिता सज्जनराज कोका, मां निर्मला कोका, बहनें जयश्री, अनीता, सुनीता और भाई संदीप मौजूद रहे।
महेंद्र भंडारी और रमेश कुमार भंसाली ने परिजनों को नेत्रदान और देहदान के महत्व और लाभों की जानकारी दी।

मां और बड़ी बहन जयश्री ने अंतिम समय तक सेवा कर समाज को मानवीय मूल्यों का संदेश दिया।


SN मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल ने जताया आभार

एसएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. बीएस जोधा ने देहदान को सबसे बड़ा दान बताते हुए परिजनों का आभार जताया।

उन्होंने कहा-
“सबसे बड़ा दान देह का दान होता है। धार्मिक दृष्टि से महर्षि दधीचि इसका सर्वोत्तम उदाहरण हैं, जिन्होंने अपनी हड्डियों का दान कर समाज और धर्म की रक्षा की।”


मेडिकल छात्रों के लिए देहदान क्यों जरूरी

डॉ. जोधा ने बताया कि आधुनिक चिकित्सा में बीमारियों को समझने और उनसे लड़ने के लिए देहदान अत्यंत आवश्यक है।
देहदान के जरिए मेडिकल छात्र मानव शरीर की संरचना, बीमारियों और उनके उपचार को प्रत्यक्ष रूप से सीख पाते हैं, जिससे वे भविष्य में बेहतर चिकित्सक बनते हैं।


SN मेडिकल कॉलेज में साल का पहला देहदान

यह देहदान एसएन मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2026 का पहला देहदान है। कॉलेज प्रशासन और चिकित्सकों ने महिला के परिजनों को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।


निष्कर्ष

पाली निवासी नीता कोका के परिजनों का यह निर्णय समाज के लिए एक मजबूत संदेश है कि मृत्यु के बाद भी जीवन दिया जा सकता है। नेत्रदान और देहदान न केवल चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन रक्षक साबित होते हैं। यह कदम मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल बन गया है।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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