दौसा। राजस्थान के उप-मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा आज दौसा के दौरे पर रहे। यहाँ लालसोट रोड स्थित बैरवा छात्रावास में आयोजित 'स्नेह मिलन एवं प्रतिभा सम्मान समारोह' में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान जहाँ एक ओर उन्होंने समाज के संघर्ष और बाबा साहब के आदर्शों पर अपनी बात रखी, वहीं दूसरी ओर मनरेगा को लेकर चल रही सियासत पर विपक्षी दल कांग्रेस को कड़ा जवाब भी दिया।
"हमने पीढ़ियों तक उपेक्षा झेली है" समारोह को संबोधित करते हुए भावुक स्वर में डॉ. बैरवा ने कहा, "हमने कई पीढ़ियों तक अन्याय, अभाव और उपेक्षा का दंश झेला है। आज भी एक युवा ने समाज के साथ हो रहे अन्याय की कुछ बातें मेरे सामने रखी हैं। लेकिन मुझे इस बात का गर्व है कि हमारा समाज अब केवल शिकायतों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह शिक्षा रूपी समाधान की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।"
बाबा साहब का मंत्र: शिक्षित बनो, संगठित रहो डिप्टी सीएम ने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन को मानवता के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि उनका पूरा जीवन समतामूलक समाज की स्थापना के लिए समर्पित था। उन्होंने समाज के युवाओं से आह्वान किया कि:
बाबा साहब के 'शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो' के मंत्र को जीवन में उतारें।
वंचित वर्ग के सशक्तिकरण के लिए एकजुट होकर काम करें।
डॉ. बैरवा ने भरोसा दिलाया कि समाज के किसी भी व्यक्ति को कोई समस्या हो, तो वे सीधे उनके पास आ सकते हैं, वे हर संभव समाधान करेंगे।
मनरेगा पर कांग्रेस को दिया जवाब विपक्ष द्वारा मनरेगा का स्वरूप और नाम बदलने के आरोपों पर डॉ. बैरवा ने पलटवार किया। उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए कहा, "कांग्रेस ने भी अपने समय में मनरेगा का नाम बदला था। पहले यह 'जवाहर रोजगार योजना' थी, जिसे बाद में कांग्रेस ने ही 'महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना' किया था। हमने पुरानी कमियों को दूर कर इसमें सुधार किया है और नाम परिवर्तन के साथ अब मजदूरों को पहले से अधिक दिनों का रोजगार मिलेगा।"
समारोह में जुटे दिग्गज इस दौरान मंच पर सिकराय विधायक विक्रम बंशीवाल, दौसा विधायक दीनदयाल बैरवा, कॉलेज शिक्षा आयुक्त ओमप्रकाश बैरवा और पूर्व विधायक नंदलाल बंशीवाल सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। छात्रावास समिति के अध्यक्ष बलवीर बंशीवाल और जिलाध्यक्ष बाबूलाल टोरडा ने भी समाज के उत्थान पर अपने विचार साझा किए।
डॉ. प्रेमचंद बैरवा का यह दौरा न केवल समाज की एकजुटता को प्रदर्शित करता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि सरकार सामाजिक न्याय के मुद्दों पर संवेदनशील है। मनरेगा पर उनके स्पष्टीकरण ने यह संकेत दे दिया है कि भाजपा सरकार इस मुद्दे पर बैकफुट पर रहने के बजाय आक्रामक तरीके से जवाब देने को तैयार है।
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