इस्लामाबाद: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया है कि भारत के साथ मई 2025 में हुए संघर्ष के बाद पाकिस्तानी फाइटर जेट्स की अंतरराष्ट्रीय मांग में इजाफा हुआ है। रेडियो पाकिस्तान के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने बुधवार को कहा कि कई देश पाकिस्तान से लड़ाकू विमान खरीदने को लेकर बातचीत कर रहे हैं।
हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि किन फाइटर जेट्स की डिमांड बढ़ी है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि JF-17 थंडर फाइटर जेट को लेकर सबसे ज्यादा रुचि दिखाई जा रही है।
कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान जिन देशों से JF-17 बेचने को लेकर चर्चा कर रहा है, उनमें बांग्लादेश, सूडान, लीबिया, सऊदी अरब, इराक और इंडोनेशिया शामिल हैं। पाकिस्तान इसे अपनी रक्षा निर्यात नीति की बड़ी सफलता के रूप में पेश कर रहा है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 12 जनवरी को इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान वायुसेना प्रमुख जहीर अहमद बाबर सिद्धू से मुलाकात की। इस दौरान करीब 40 JF-17 फाइटर जेट खरीदने पर चर्चा हुई।
वहीं बांग्लादेश के प्रमुख अखबार डेली स्टार ने दावा किया है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश के वायुसेना प्रमुखों के बीच JF-17 को लेकर बातचीत हो चुकी है। हालांकि, अब तक कोई औपचारिक कॉन्ट्रैक्ट साइन नहीं हुआ है।
इसी तरह रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि 7 जनवरी को पाकिस्तान ने सऊदी अरब से भी JF-17 बेचने को लेकर बातचीत की। बताया जा रहा है कि यह डील सऊदी अरब से मिले 2 अरब डॉलर के लोन के बदले की जा सकती है। हालांकि पाकिस्तानी सेना और सऊदी अरब की ओर से इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
रॉयटर्स की 9 जनवरी की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक दशक में कई देशों ने JF-17 खरीदने में रुचि दिखाई है। नाइजीरिया, म्यांमार और अजरबैजान के सैन्य बेड़े में यह फाइटर जेट पहले से शामिल है।
अल-जजीरा के अनुसार, पाकिस्तान ने दिसंबर 2025 में लीबिया के विद्रोही गुट लीबियाई नेशनल आर्मी (LNA) के साथ करीब 4 अरब डॉलर में एक दर्जन से अधिक JF-17 बेचने का सौदा किया था। इसे पाकिस्तान के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी हथियार डील बताया गया है।
इसके अलावा रॉयटर्स ने यह भी दावा किया है कि पाकिस्तान सूडान के साथ करीब 12,500 करोड़ रुपये की रक्षा डील पर काम कर रहा है, जिसमें JF-17 फाइटर जेट भी शामिल हैं।
पाकिस्तान सरकार के अनुसार, JF-17 थंडर एक मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है, जिसे पाकिस्तान और चीन ने मिलकर जून 2007 में विकसित किया था। इसका डिजाइन चीन की चेंगडू एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (CAC) ने तैयार किया, जबकि फाइनल असेंबलिंग पाकिस्तान एयरोनॉटिकल कॉम्प्लेक्स (PAC) में की जाती है।
JF-17 के निर्माण में लगभग 58% हिस्सा पाकिस्तान और 42% हिस्सा चीन का है। इसमें इस्तेमाल होने वाला क्लिमोव RD-93 इंजन और नए ब्लॉक-3 में RD-93MA इंजन रूस में बना है, जिसे चीन के माध्यम से पाकिस्तान को सप्लाई किया जाता है।
ग्लोबल डिफेंस कॉर्प की रिपोर्ट के मुताबिक, JF-17 के मेंटेनेंस और स्पेयर पार्ट्स के लिए पाकिस्तान काफी हद तक चीन पर निर्भर है। वहीं रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते रूसी इंजन की सप्लाई भी प्रभावित हुई है।
इसके अलावा, JF-17 कोई स्टेल्थ फाइटर जेट नहीं है। यानी यह दुश्मन के रडार सिस्टम से आसानी से पकड़ा जा सकता है।
JF-17 की प्रमुख खामियां:
एक ही RD-93 इंजन होने से थ्रस्ट सीमित
लगभग 3.6 टन से ज्यादा हथियार ले जाने में असमर्थ
एवियोनिक्स सिस्टम को आउटडेटेड माना जाता है
इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और जैमिंग सिस्टम सीमित क्षमता वाला
JF-17 थंडर को 4.5 पीढ़ी का हल्का मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट माना जाता है। इसकी तुलना भारत के तेजस, अमेरिका के F-16 और रूस के MiG-29 से की जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इन सभी के मुकाबले JF-17 की सबसे बड़ी ताकत इसकी कम कीमत है। यही कारण है कि सीमित बजट वाले देशों के लिए यह एक आकर्षक विकल्प बन रहा है।
भारत के साथ संघर्ष के बाद पाकिस्तान JF-17 फाइटर जेट की बढ़ती मांग को अपनी सैन्य और कूटनीतिक सफलता के रूप में पेश कर रहा है। हालांकि, अब तक कई डील केवल बातचीत के स्तर पर हैं और आधिकारिक समझौते होना बाकी हैं। तकनीकी कमजोरियों के बावजूद कम लागत के कारण JF-17 विकासशील देशों के लिए एक विकल्प बना हुआ है, लेकिन इसकी वास्तविक प्रभावशीलता भविष्य के सौदों पर निर्भर करेगी।
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