JLF में गौर गोपालदास का बड़ा संदेश: रिश्तों से बढ़कर कुछ नहीं, मौत बदनाम है—असल तकलीफ जिंदगी से है

जयपुर: के JLN मार्ग स्थित होटल क्लार्क्स आमेर में चल रहे जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) के तीसरे दिन शनिवार को विचार, संवेदना और आत्ममंथन से जुड़े सत्रों ने श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया। दिन की शुरुआत राज्यसभा सांसद और लेखिका सुधा मूर्ति के संबोधन से हुई, जबकि मोटिवेशनल स्पीकर गौर गोपालदास की बातें श्रोताओं के दिल तक उतर गईं।

गौर गोपालदास ने अपने संबोधन में रिश्तों की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि रिश्तों से ज्यादा जरूरी शायद कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा कि कब तक अकेले रहोगे, कोई तो चाहिए जिससे अपनी कहानी साझा कर सको। पैसा और सफलता सब पीछे रह जाते हैं, अगर इंसान अकेला रह जाए तो इनका कोई अर्थ नहीं बचता।

उन्होंने जीवन की पीड़ा पर बात करते हुए कहा कि लोग अक्सर मौत को बेवजह बदनाम करते हैं, जबकि असली तकलीफ तो जिंदगी से होती है। हर इंसान की जिंदगी में कोई न कोई बोझ होता है, जो उसे भीतर से परेशान करता है। सवाल यह है कि आज आप कौन-सा बोझ नीचे रखने को तैयार हैं।

सोशल मीडिया के दौर पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि आज लोग अपनी सेल्फी पूरी दुनिया को दिखा देते हैं, लेकिन दिल की बात कहने के लिए किसी अपने की जरूरत होती है। यही रिश्तों की असली ताकत है।

सुधा मूर्ति ने मदरलैंड और मदर लैंग्वेज पर की बात

JLF के तीसरे दिन की शुरुआत राज्यसभा सांसद और इंफोसिस के सह-संस्थापक एन. आर. नारायण मूर्ति की पत्नी सुधा मूर्ति के संबोधन से हुई। उन्होंने अपनी मातृभूमि और मातृभाषा के महत्व पर विचार साझा किए और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को सहेजने की जरूरत पर जोर दिया।

यतींद्र मिश्र को मिला कन्हैयालाल सेठिया अवॉर्ड

देश के जाने-माने लेखक और अयोध्या के पूर्व राजपरिवार के सदस्य यतींद्र मिश्र को जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में कन्हैयालाल सेठिया अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इस मौके पर संजॉय के. रॉय, नमिता गोखले, रंजीत होसकोटे और गौर गोपालदास भी मौजूद रहे।

अवार्ड स्वीकार करते हुए यतींद्र मिश्र ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने डेढ़ साल के भीतर अपनी मां और पिता दोनों को खो दिया। काश, वे इस सम्मान को उन्हें दिखा पाते। उन्होंने कहा कि प्रियजनों के बिछड़ने के बाद ही अक्सर प्रसिद्धि या पुरस्कार मिलते हैं।

यतींद्र मिश्र ने मंच से यह भी स्पष्ट किया कि अयोध्या के राजा श्रीराम हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें अयोध्या का राजा कहकर संबोधित किया गया, लेकिन वे स्वयं को केवल श्रीराम का सेवक मानते हैं।

साहित्य और विचारों का संगम

लेखिका नमिता गोखले ने कहा कि यतींद्र मिश्र संगीत और भारतीय कलाओं पर निरंतर लेखन करते आए हैं। उनकी लता मंगेशकर पर लिखी जीवनी को बेहद खास बताया गया। वहीं, JLF के आयोजक संजॉय रॉय ने कहा कि यतींद्र मिश्र का लेखन अपनी अलग पहचान रखता है।

शनिवार को होने वाले अन्य प्रमुख सत्रों में गांधी, सावरकर और जिन्ना के विचारों, उनकी विरासत और आज के भारत पर उनके प्रभाव को लेकर भी संवाद किया जाएगा। तीसरे दिन बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी JLF में पहुंचे।


निष्कर्ष:

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के तीसरे दिन रिश्तों, जीवन और संवेदनाओं पर हुई चर्चाओं ने यह संदेश दिया कि साहित्य केवल शब्द नहीं, बल्कि आत्मा को छूने का माध्यम है। गौर गोपालदास के विचारों से लेकर यतींद्र मिश्र की भावुक स्वीकारोक्ति तक, JLF का यह दिन श्रोताओं के लिए यादगार बन गया।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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