नांगल-राजावतान: स्थित राजकीय कॉलेज नांगल-राजावतान में राजस्थान दिवस के अवसर पर ‘विकसित राजस्थान’ विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
यह कार्यक्रम राज्यभर में मनाए जा रहे राजस्थान दिवस समारोह के अंतर्गत आयोजित साप्ताहिक गतिविधियों का हिस्सा था, जिसमें छात्रों और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
संगोष्ठी के दौरान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राजेन्द्र सिंह गुर्जर ने राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति, लोक कला, मेलों, पर्यटन स्थलों और धार्मिक तीर्थों पर विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि राजस्थान अपनी ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक विविधता के कारण देश-विदेश में एक अलग पहचान रखता है।
कार्यक्रम में डॉ. आशुतोष मीणा ने राजस्थान के विकास में जल संसाधनों की भूमिका पर प्रकाश डाला।
उन्होंने इंदिरा गांधी नहर और बीसलपुर बांध को प्रदेश की “जीवनरेखा” बताते हुए इनके महत्व को समझाया।
सप्ताहभर चलने वाले इस कार्यक्रम के तहत 15 मार्च को निबंध और भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।
भाषण प्रतियोगिता का विषय ‘विकसित राजस्थान’ रखा गया, जिसमें छात्रों ने अपने विचार प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किए।
भाषण प्रतियोगिता में सुशीला मीणा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
द्वितीय स्थान पर मोनिका मीणा और तृतीय स्थान पर ललिता मीणा रहीं।
‘राजस्थान की लोक संस्कृति’ विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में गणपत मीणा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
द्वितीय स्थान सुशीला मीणा और तृतीय स्थान ललिता मीणा को मिला।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. रामगोपाल मीणा ने किया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के कई संकाय सदस्य उपस्थित रहे, जिनमें डॉ. रतन सिंह चारण, डॉ. प्रमिला यादव, कुमेर महावर, राजेन्द्र मीणा, जगदीश प्रसाद शर्मा, मक्खन लाल मीणा और विनोद कुमार जांगिड़ शामिल थे।
साथ ही बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
इस तरह के कार्यक्रम छात्रों को अपनी प्रतिभा दिखाने और नए विचार प्रस्तुत करने का अवसर देते हैं।
प्रतियोगिताओं के माध्यम से छात्रों में आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धात्मक भावना का विकास होता है।
राजस्थान दिवस के अवसर पर आयोजित ऐसे कार्यक्रम प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और विकास की दिशा को समझने का अवसर प्रदान करते हैं।
यह न केवल छात्रों को अपनी जड़ों से जोड़ता है, बल्कि उन्हें भविष्य के लिए प्रेरित भी करता है।
नांगल-राजावतान के राजकीय कॉलेज में आयोजित यह संगोष्ठी और प्रतियोगिताएं छात्रों के लिए प्रेरणादायक साबित हुईं।
‘विकसित राजस्थान’ जैसे विषय पर चर्चा ने युवाओं को राज्य के विकास में अपनी भूमिका समझने का मौका दिया।
ऐसे आयोजनों से शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक जागरूकता भी बढ़ती है।
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