गरीबी को हराकर जुड़वा भाइयों का कमाल! हंसराज-हेमराज ने बोर्ड में लहराया परचम

राजस्थान: के दौसा जिले के लालसोट क्षेत्र से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जहां सीमित संसाधनों और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद दो जुड़वा भाइयों ने अपनी मेहनत और लगन से बड़ी सफलता हासिल की है।

राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कोलीवाड़ा के छात्र हंसराज बेरवा और हेमराज बेरवा ने बोर्ड परीक्षा में शानदार प्रदर्शन कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे गांव का नाम रोशन किया है।

शानदार अंकों से सबको चौंकाया

हंसराज बेरवा ने 98.20% अंक प्राप्त कर विद्यालय में शीर्ष स्थान हासिल किया, जबकि उनके भाई हेमराज बेरवा ने 96.80% अंक प्राप्त किए। दोनों भाइयों की इस उपलब्धि ने उन्हें क्षेत्र के मेधावी छात्रों की सूची में शामिल कर दिया है।

अन्य छात्रों ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। कक्षा 12वीं में चाइना मीना ने 92% अंक प्राप्त किए, जबकि कक्षा 10वीं में बिंदिया सैनी (92.67%), रोहित सैनी (90.20%) और बिंदु राजपूत (89.83%) ने भी बेहतरीन परिणाम दिए।

स्कूल में सम्मान समारोह

इन सभी मेधावी छात्रों का विद्यालय में सम्मान किया गया। प्रधानाचार्य हंसराज गुप्ता ने छात्रों को सम्मानित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

कार्यक्रम में स्कूल स्टाफ और अन्य विद्यार्थियों ने भी टॉपर्स की सफलता पर खुशी जाहिर की और उन्हें प्रेरणा का स्रोत बताया।

आर्थिक तंगी के बावजूद नहीं मानी हार

हंसराज और हेमराज की सफलता की सबसे खास बात यह है कि उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। उनके पिता भगवान सहाय बेरवा जयपुर में मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं।

सीमित संसाधनों के बावजूद दोनों भाइयों ने अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दिया और कठिन परिश्रम के बल पर यह मुकाम हासिल किया।

नियमित पढ़ाई और अनुशासन का असर

अध्यापक शंकर लाल स्वामी के अनुसार, दोनों छात्र बेहद अनुशासित और मेहनती थे। वे नियमित रूप से स्कूल आते थे और हर परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करते थे।

घर पर रोजाना 4 से 5 घंटे पढ़ाई करने के साथ-साथ वे लाइब्रेरी में भी समय बिताते थे। उनकी इसी निरंतर मेहनत का परिणाम उनके शानदार अंकों के रूप में सामने आया।

शिक्षकों ने निभाई अहम भूमिका

विद्यालय में कुछ विषयों के शिक्षकों की कमी के बावजूद स्टाफ ने अतिरिक्त जिम्मेदारी निभाई।

शंकर लाल स्वामी ने भूगोल विषय पढ़ाया, जिसमें दोनों भाइयों ने 100% अंक प्राप्त किए। वहीं इतिहास विषय वरिष्ठ अध्यापक महावीर प्रसाद जैन ने पढ़ाया, जिसमें भी छात्रों ने पूरे अंक हासिल किए।

ग्रामीण शिक्षा के लिए प्रेरणा

यह सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण है।

यह दिखाता है कि अगर छात्र मेहनत और लगन से पढ़ाई करें, तो सीमित संसाधनों में भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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