होली: का त्योहार खुशियों, रंगों और उमंग का प्रतीक है, लेकिन यही रंग अगर केमिकल से भरे हों तो आंखों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। जोधपुर स्थित मथुरादास माथुर हॉस्पिटल के आई विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद चौहान ने शहरवासियों को आगाह किया है कि होली खेलते समय विशेष सावधानी बरतें, खासकर बच्चों की आंखों की सुरक्षा को लेकर।
डॉ. चौहान ने बताया कि बाजार में बिकने वाले कई चमकीले और सस्ते गुलाल में भारी मात्रा में केमिकल और सिंथेटिक डाई मिलाई जाती है। ये रंग त्वचा पर एलर्जी तो करते ही हैं, लेकिन आंखों में चले जाने पर अधिक गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।
उन्होंने कहा, “गुब्बारों में भरकर फेंके जाने वाले रंग सीधे आंखों में लगते हैं, जिससे कॉर्निया में खरोंच, तेज जलन, सूजन और संक्रमण हो सकता है। कुछ मामलों में स्थायी दृष्टि हानि भी हो सकती है।” छोटे बच्चे इनका सबसे आसान शिकार होते हैं, क्योंकि वे खुद को बचाने में सक्षम नहीं होते।
इन दिनों अस्पताल की ओपीडी में आंखों से संबंधित शिकायतों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। डॉक्टरों के अनुसार, होली के आसपास केमिकल कलर के कारण आंखों में जलन, लालिमा, धुंधला दिखना और पानी आना जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि कई लोग आंखों में रंग जाने पर घरेलू नुस्खे अपनाते हैं, जो कभी-कभी स्थिति को और बिगाड़ देते हैं। इसलिए सही प्राथमिक उपचार और समय पर डॉक्टर से संपर्क बेहद जरूरी है।
डॉ. चौहान ने विशेष रूप से अभिभावकों को सावधान किया है। उन्होंने कहा कि बच्चों की आंखों की सतह अधिक संवेदनशील होती है। तेज रासायनिक रंग उनके लिए ज्यादा नुकसानदेह साबित हो सकते हैं। कई बार बच्चे दर्द या जलन की शिकायत भी स्पष्ट रूप से नहीं कर पाते, जिससे समस्या गंभीर हो जाती है।
उन्होंने सलाह दी कि बच्चों को निगरानी में रखें और कोशिश करें कि उनके चेहरे और आंखों पर रंग न लगे। यदि कोई जबरन रंग लगाता है तो तुरंत साफ पानी से धोएं।
प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करें – हल्दी, चंदन, गुलाब या गेंदे के फूलों से बने हर्बल गुलाल ही खरीदें।
चमकीले और केमिकल वाले रंगों से बचें – खासकर वे रंग जिनकी पैकिंग पर सामग्री का विवरण न हो।
गुब्बारों से दूरी रखें – पानी या रंग भरे गुब्बारे आंखों के लिए गंभीर चोट का कारण बन सकते हैं।
आंखों में रंग चले जाए तो क्या करें?
तुरंत ठंडे और साफ पानी से आंखें धोएं।
आंखें रगड़ें नहीं, इससे कॉर्निया को नुकसान हो सकता है।
जलन या दर्द बना रहे तो तुरंत नजदीकी अस्पताल जाएं।
कॉन्टैक्ट लेंस न पहनें – होली खेलते समय लेंस की जगह चश्मा पहनना बेहतर है।
सनग्लास का उपयोग करें – बाहर निकलते समय आंखों को ढकने वाले चश्मे का इस्तेमाल अतिरिक्त सुरक्षा दे सकता है।
आंख की बाहरी परत यानी कॉर्निया बेहद नाजुक होती है। केमिकल के संपर्क में आने पर इसमें सूजन (केराटाइटिस) या इंफेक्शन हो सकता है। यदि समय पर इलाज न हो तो दृष्टि पर स्थायी असर पड़ सकता है। इसलिए होली की खुशी में लापरवाही न बरतें।
डॉ. चौहान ने कहा, “होली खुशियों का त्योहार है, इसे सुरक्षित तरीके से मनाएं। प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें और किसी की आंखों या चेहरे पर जबरदस्ती रंग न लगाएं।”
उन्होंने अपील की कि यदि किसी को आंखों में गंभीर जलन, धुंधलापन या दर्द महसूस हो तो तुरंत विशेषज्ञ से जांच कराएं। देरी करने से समस्या बढ़ सकती है।
होली की मस्ती में अक्सर हम सुरक्षा को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन आंखों की सेहत के साथ लापरवाही भारी पड़ सकती है। नकली और केमिकल गुलाल से बचकर, प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल कर और सही प्राथमिक उपचार अपनाकर हम त्योहार को सुरक्षित और खुशहाल बना सकते हैं। खासकर बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें और जरूरत पड़ने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
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