SMS हॉस्पिटल में दवाइयों का बड़ा खेल? स्टॉक में होने के बावजूद मरीजों को लौटाया जा रहा खाली हाथ

राजस्थान: की राजधानी Jaipur के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल Sawai Man Singh Hospital में दवाइयों को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि अस्पताल के डीडीसी स्टोर में दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद मरीजों को दवाइयां नहीं दी जा रही हैं।

इसके बजाय मरीजों से डॉक्टर की पर्ची जमा करवाकर उन्हें एक या दो दिन बाद आने के लिए कहा जा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि यह सब लोकल स्तर पर दवाइयों की खरीद के नाम पर किया जा रहा है, जिससे महंगी दरों पर दवा खरीदने की प्रक्रिया शुरू हो सके।

इस व्यवस्था से मरीजों को न सिर्फ परेशानी हो रही है बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।


73 वर्षीय बुजुर्ग मरीज के साथ हुआ मामला

यह मामला 4 मार्च को सामने आया जब 73 वर्षीय एक बुजुर्ग मरीज इलाज के लिए Charak Bhawan पहुंचे। डॉक्टर ने जांच के बाद उन्हें कुछ दवाइयां लिखकर दीं।

जब मरीज दवाइयां लेने के लिए डीसीसी काउंटर पर पहुंचा तो वहां मौजूद फार्मासिस्ट ने कुछ दवाइयां तो दे दीं, लेकिन एक-दो जरूरी दवाइयां देने से मना कर दिया।

फार्मासिस्ट ने मरीज को कहा कि यह दवाइयां यहां उपलब्ध नहीं हैं और उन्हें काउंटर नंबर 11 पर जाना होगा।

जब बुजुर्ग मरीज काउंटर नंबर 11 पर पहुंचे तो वहां उनसे पर्ची और पहचान पत्र की फोटोकॉपी लाने के लिए बाजार भेज दिया गया।

मरीज फोटोकॉपी करवाकर वापस लौटा, लेकिन वहां मौजूद फार्मासिस्ट अजीत सिंह चौधरी ने पर्ची जमा करके उन्हें दो दिन बाद आने के लिए कह दिया।


जांच में सामने आया बड़ा सवाल

इस पूरे मामले की पड़ताल की गई तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई।

जिस दवा के लिए मरीज को दो दिन बाद आने के लिए कहा गया था, वह दवा अस्पताल के IHMS पोर्टल पर स्टॉक में उपलब्ध दिखाई दे रही थी।

जानकारी के अनुसार अस्पताल के विभिन्न डीडीसी काउंटरों पर उस दवा की 70 से ज्यादा यूनिट्स मौजूद थीं।

इसके बावजूद मरीज को तुरंत दवा देने के बजाय इंतजार करने के लिए कहा गया। इससे यह संदेह गहराता है कि कहीं लोकल खरीद की प्रक्रिया के जरिए दवा खरीद में गड़बड़ी तो नहीं की जा रही।


लोकल खरीद का सिस्टम क्यों बनाया गया था

सरकारी अस्पतालों में कई बार दवाइयों का स्टॉक अचानक खत्म हो जाता है। इस समस्या को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने लोकल खरीद का सिस्टम बनाया था।

इस सिस्टम के तहत अगर किसी दवा का स्टॉक खत्म हो जाए तो मरीज को काउंटर नंबर 11 पर भेजा जाता है।

अस्पताल के नियम के मुताबिक वहां से चार घंटे के अंदर लोकल बाजार से दवा खरीदकर मरीज को उपलब्ध करानी होती है।

इसके लिए पहले से ही दुकानदारों के साथ टेंडर और रेट कॉन्ट्रैक्ट तय किए जाते हैं ताकि मरीजों को दवाइयां तुरंत मिल सकें।


लेकिन व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

मौजूदा मामले में समस्या यह है कि जब दवाइयां अस्पताल के स्टॉक में मौजूद थीं, तब भी मरीज को काउंटर नंबर 11 पर भेजा गया।

और वहां भी तुरंत दवा देने के बजाय दो दिन बाद आने के लिए कहा गया।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ऐसा हो रहा है तो यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही या संभावित गड़बड़ी का संकेत हो सकता है।


मरीजों की बढ़ रही परेशानी

सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले अधिकांश मरीज आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते हैं।

ऐसे में उन्हें बार-बार अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ते हैं तो उनकी परेशानी कई गुना बढ़ जाती है।

कई मरीजों ने बताया कि उनके साथ भी इसी तरह की स्थिति हुई है। डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाइयां तुरंत नहीं दी जातीं और पर्ची जमा करवा ली जाती है।

इसके बाद उन्हें एक-दो दिन बाद आने के लिए कहा जाता है।


दवाइयों की सप्लाई भी बनी बड़ी समस्या

राजस्थान सरकार की मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मुफ्त दवाइयां दी जाती हैं।

इन दवाइयों की खरीद और सप्लाई का काम Rajasthan Medical Services Corporation Limited के जरिए किया जाता है।

लेकिन कई अस्पतालों में दवाइयों की समय पर सप्लाई नहीं हो पाने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।

जब दवाइयों की कमी होती है तो लोकल खरीद का सिस्टम मरीजों की सुविधा के लिए बनाया गया था, लेकिन अब उसी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।


मॉनिटरिंग की कमी से बिगड़ रही व्यवस्था

इस पूरे मामले में सबसे बड़ी समस्या मॉनिटरिंग की कमी बताई जा रही है।

अस्पताल में मेडिकल ऑफिसर इंचार्ज और संबंधित अधिकारियों की नियमित निगरानी नहीं होने के कारण कई व्यवस्थाएं ठीक से लागू नहीं हो पा रही हैं।

इसके कारण मरीजों को अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ रही है और उनकी शिकायतों को सुनने वाला भी कोई नहीं है।


निष्कर्ष:

राजधानी Jaipur के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल Sawai Man Singh Hospital में सामने आया यह मामला स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

अगर स्टॉक में दवाइयां मौजूद होने के बावजूद मरीजों को नहीं दी जा रही हैं तो यह प्रशासनिक लापरवाही या संभावित गड़बड़ी का संकेत हो सकता है।

जरूरी है कि अस्पताल प्रशासन इस पूरे मामले की जांच करे और यह सुनिश्चित करे कि मरीजों को समय पर दवाइयां मिलें और उन्हें अनावश्यक रूप से अस्पताल के चक्कर न लगाने पड़ें।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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