उत्तर प्रदेश: में गोकशी और गोतस्करी के खिलाफ सरकार की सख्त नीति का असर लगातार दिखाई दे रहा है। राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के निर्देश पर चलाए गए विशेष अभियान के तहत अब तक 35 हजार से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस दौरान 14 हजार से ज्यादा मामले दर्ज किए गए और कई संगठित गिरोहों के नेटवर्क को भी तोड़ा गया है।
सरकार का कहना है कि प्रदेश में गोकशी और अवैध पशु वध को रोकने के लिए “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत लगातार कार्रवाई की जा रही है। यही वजह है कि पुलिस और प्रशासन को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
राज्य सरकार के अनुसार, प्रदेश में गोकशी और गोतस्करी के खिलाफ अभियान चलाकर अब तक कुल 14,182 मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में 35,924 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
इन मामलों में सिर्फ सामान्य धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज करने तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रही, बल्कि आरोपियों के खिलाफ कई कठोर कानूनों का भी इस्तेमाल किया गया है। सरकार का कहना है कि इससे संगठित अपराध करने वाले गिरोहों पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिली है।
गोकशी से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किए गए आरोपियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की गई है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार:
13,793 आरोपियों पर गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई की गई
178 आरोपियों के खिलाफ National Security Act (NSA) लगाया गया
14,305 मामलों में Uttar Pradesh Gangsters and Anti-Social Activities (Prevention) Act के तहत कार्रवाई की गई
सरकार का मानना है कि इन सख्त कानूनी कदमों से गोकशी और गोतस्करी से जुड़े संगठित गिरोहों की कमर तोड़ने में मदद मिली है।
गोकशी के मामलों में केवल गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी गई। सरकार ने आर्थिक रूप से भी अपराधियों को कमजोर करने के लिए उनकी संपत्तियों पर प्रहार किया।
गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) के तहत कार्रवाई करते हुए लगभग 83 करोड़ 32 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। इस दौरान अवैध कमाई से खरीदी गई जमीन, वाहन और अन्य संपत्तियों को भी कुर्क किया गया।
सरकार का कहना है कि अपराध से अर्जित संपत्ति जब्त करने से अपराधियों की आर्थिक ताकत कमजोर होती है और इससे भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने में मदद मिलती है।
प्रदेश में गोकशी और गोतस्करी पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस की विशेष टीमें भी गठित की गई हैं। इन टीमों के माध्यम से खुफिया निगरानी, जिलास्तरीय टास्क फोर्स और सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
संवेदनशील जिलों में रात के समय पुलिस गश्त बढ़ाई गई है और पशु परिवहन से जुड़े मामलों पर भी विशेष नजर रखी जा रही है। इसके अलावा अवैध बूचड़खानों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
सरकार का कहना है कि इन कार्रवाइयों के कारण प्रदेश में गोकशी और अवैध पशु वध से जुड़े मामलों में काफी कमी आई है।
प्रदेश में गोकशी रोकने के लिए वर्ष 2020 में कानून को और सख्त बनाया गया था। इसके तहत Uttar Pradesh Prevention of Cow Slaughter (Amendment) Ordinance, 2020 लागू किया गया।
इस अध्यादेश के तहत कई कड़े प्रावधान जोड़े गए, जिनमें:
गोहत्या करने पर 10 साल तक कठोर कारावास
3 से 5 लाख रुपये तक जुर्माना
गोवंश को नुकसान पहुंचाने पर 7 साल की जेल और 3 लाख रुपये तक जुर्माना
सरकार का कहना है कि कानून में किए गए इन संशोधनों का उद्देश्य गोकशी और गोतस्करी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।
राज्य सरकार का मानना है कि गोकशी का मुद्दा केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं है। यह सामाजिक आस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है।
इसी वजह से प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रखी जाए और संगठित गिरोहों को पूरी तरह खत्म किया जाए।
उत्तर प्रदेश में गोकशी और गोतस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान ने हजारों आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया है और संगठित नेटवर्क को भी बड़ा झटका दिया है। सरकार का दावा है कि सख्त कानून, विशेष अभियान और आर्थिक कार्रवाई के जरिए प्रदेश में अवैध पशु वध पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया है। आने वाले समय में भी ऐसे अपराधों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहने की बात कही गई है।
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