देश: में रसोई गैस यानी Liquefied Petroleum Gas का संकट लगातार गहराता जा रहा है। कई राज्यों में गैस सिलेंडर की किल्लत के कारण लोगों को घंटों कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है। कुछ जगहों पर सिलेंडर के लिए भगदड़ जैसी स्थिति बन रही है, तो कहीं कालाबाजारी और जमाखोरी की शिकायतें सामने आ रही हैं।
बताया जा रहा है कि पश्चिम एशिया में जारी Iran–Israel conflict के कारण वैश्विक ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसका असर अब भारत के घरेलू बाजार में भी दिखाई देने लगा है।
उत्तर प्रदेश के Farrukhabad में गैस सिलेंडर लेने के लिए लाइन में लगे 76 वर्षीय मोहम्मद मुख्तियार की अचानक तबीयत बिगड़ गई। वे सुबह करीब साढ़े छह बजे गैस एजेंसी पहुंचे थे और अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।
इसी दौरान उन्हें हार्ट अटैक आया और वे गिर पड़े। परिजन उन्हें तुरंत अस्पताल लेकर गए, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद इलाके में शोक का माहौल है।
इसी तरह Punjab के बरनाला में भी सिलेंडर की लाइन में लगे एक बुजुर्ग की हार्ट अटैक से मौत की खबर सामने आई है।
उत्तर प्रदेश के Siddharthnagar में लोग रात से ही गैस एजेंसी के बाहर बैठकर सिलेंडर का इंतजार कर रहे हैं। शनिवार सुबह तक भी कई लोगों को सिलेंडर नहीं मिल सके।
इसी तरह Kannauj में गैस सिलेंडर की कमी को लेकर लोगों ने एजेंसी के बाहर हंगामा किया।
राजस्थान के Jaipur और Bharatpur सहित कई जिलों में भी गैस एजेंसियों के बाहर लंबी लाइनें देखी जा रही हैं। कई ग्राहकों का कहना है कि बुकिंग के बावजूद उन्हें समय पर सिलेंडर नहीं मिल रहा।
गैस संकट का असर होटल और रेस्टोरेंट उद्योग पर भी पड़ रहा है। Raipur, Bilaspur, Bhilai और Raigarh जैसे शहरों में कई होटल गैस की कमी के कारण ग्राहकों से 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क वसूल रहे हैं।
कई जगहों पर रसोई गैस खत्म होने के कारण होटल लकड़ी के चूल्हों पर खाना बनाने के लिए मजबूर हो गए हैं। कुछ रेस्टोरेंट्स ने तो अपने मेन्यू में भी कटौती कर दी है।
Madhya Pradesh के Chhindwara में गैस गोदामों के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई। विवाद की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने पुलिस की मौजूदगी में सिलेंडर बांटने का फैसला किया।
भोपाल और इंदौर सहित कई शहरों में भी लोग घंटों कतारों में खड़े होकर गैस सिलेंडर लेने के लिए मजबूर हैं। कई परिवारों ने वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर इंडक्शन चूल्हे और डीजल भट्ठियों का उपयोग शुरू कर दिया है।
गैस की कमी का असर Bihar में भी साफ दिखाई दे रहा है। कई जिलों में गैस सिलेंडर की सप्लाई कम होने से लोग लकड़ी और कोयले की तरफ लौट रहे हैं।
इस वजह से बाजार में लकड़ी और कोयले की मांग तेजी से बढ़ गई है और इनके दाम भी बढ़ने लगे हैं। इसके अलावा इंडक्शन कुकर की कीमतें भी कई जगह पांच गुना तक बढ़ने की खबर है।
गैस संकट के बीच कई जगह सिलेंडरों की कालाबाजारी और जमाखोरी की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। जहां कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत करीब 2 हजार रुपये होती है, वहीं कुछ इलाकों में इसे 4 हजार रुपये तक में बेचा जा रहा है।
प्रशासन ने इस पर सख्ती दिखाते हुए कई राज्यों में गोदामों और एजेंसियों पर छापेमारी शुरू कर दी है।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि एलपीजी उत्पादन में करीब 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई है ताकि आपूर्ति को सामान्य किया जा सके। इसके बावजूद कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लगी लंबी कतारें इस संकट की गंभीरता को दिखा रही हैं।
देश में एलपीजी संकट का असर अब आम लोगों के दैनिक जीवन से लेकर होटल उद्योग तक दिखाई देने लगा है। लंबी कतारें, कालाबाजारी और बढ़ती कीमतों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है।
All Rights Reserved & Copyright © 2015 By HP NEWS. Powered by Ui Systems Pvt. Ltd.