राजस्थान: की राजधानी जयपुर में मंगलवार को आयुष मेडिकल ऑफिसर भर्ती प्रक्रिया को लेकर बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की आयुष मेडिकल ऑफिसर भर्ती में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए बड़ी संख्या में होम्योपैथी और यूनानी डॉक्टरों ने शहीद स्मारक पर धरना दिया।
प्रदर्शन में शामिल अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी, तकनीकी त्रुटियों और चयन प्रणाली में असमानता का आरोप लगाया। डॉक्टरों ने सरकार से निष्पक्ष समाधान और भर्ती प्रक्रिया की दोबारा समीक्षा की मांग उठाई।
धरना-प्रदर्शन के दौरान जयपुर के शहीद स्मारक पर बड़ी संख्या में अभ्यर्थी मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर भर्ती प्रक्रिया के खिलाफ नारेबाजी की।
अभ्यर्थियों का कहना था कि सरकार की गलत चयन प्रणाली के कारण हजारों योग्य उम्मीदवारों का भविष्य खतरे में पड़ गया है।
कई अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया में शुरू से ही तकनीकी खामियां थीं, लेकिन उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया।
धरना दे रहे अभ्यर्थियों ने साफ कहा कि यदि सरकार जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि:
अभ्यर्थियों का कहना है कि वे अपने अधिकारों के लिए अंतिम स्तर तक संघर्ष करेंगे।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने पहले ही विभाग को आगाह किया था कि अलग-अलग आयुष पद्धतियों के प्रश्नपत्रों का कठिनाई स्तर समान रखना संभव नहीं होगा।
इसके बावजूद सभी पद्धतियों के लिए एक जैसी चयन प्रणाली लागू कर दी गई।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि:
इन वजहों से कई योग्य अभ्यर्थी चयन सूची से बाहर हो गए।
प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने बताया कि परीक्षा केवल एक ही पारी में आयोजित की गई थी। इसी कारण नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया लागू नहीं की जा सकी।
अभ्यर्थियों का कहना है कि अलग-अलग पद्धतियों में प्रश्न हटाए जाने से करीब 6 प्रतिशत तक अंकों का अंतर पैदा हो गया।
इस असंतुलन का सीधा असर हजारों होम्योपैथी और यूनानी अभ्यर्थियों पर पड़ा है।
धरने में शामिल डॉक्टरों ने सरकार से मांग की कि:
अभ्यर्थियों का कहना है कि अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियों के लिए अलग चयन प्रक्रिया होनी चाहिए ताकि किसी भी वर्ग के साथ अन्याय न हो।
इस भर्ती विवाद ने प्रदेशभर के आयुष डॉक्टरों में नाराजगी बढ़ा दी है। कई जिलों से आए अभ्यर्थियों ने कहा कि वे लंबे समय से भर्ती का इंतजार कर रहे थे।
कुछ अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि वर्षों की मेहनत और तैयारी के बावजूद भर्ती प्रक्रिया की खामियों के कारण उनका करियर प्रभावित हो रहा है।
इस पूरे विवाद के बाद स्वास्थ्य विभाग और भर्ती एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और समानता बेहद जरूरी है। यदि चयन प्रणाली पर भरोसा कमजोर होता है तो युवाओं में निराशा बढ़ती है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ जयपुर तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में पूरे राजस्थान में जिला स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।
अभ्यर्थियों ने कहा कि जब तक भर्ती प्रक्रिया में सुधार नहीं होगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
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