राजस्थान: के भरतपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने शिक्षा व्यवस्था और स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक सरकारी स्कूल में मात्र 3 रुपए के विवाद को लेकर महिला टीचर द्वारा 8 साल की मासूम बच्ची की बेरहमी से पिटाई करने का आरोप लगा है। बच्ची की पीठ पर डंडों के गहरे निशान और घाव देखकर परिजन स्तब्ध रह गए। घटना के बाद गांव में भी भारी आक्रोश फैल गया है।
यह घटना भरतपुर जिले के सेवर थाना क्षेत्र के एक सरकारी स्कूल की बताई जा रही है। पीड़ित बच्ची तीसरी कक्षा में पढ़ती है। बच्ची की मां ने मंगलवार को थाने पहुंचकर आरोपी शिक्षिका के खिलाफ FIR दर्ज करवाई और कड़ी कार्रवाई की मांग की।
परिजनों के मुताबिक सोमवार सुबह स्कूल शुरू होने से पहले बच्चे मैदान में खेल रहे थे। इसी दौरान किसी छात्र की जेब से 3 रुपए नीचे गिर गए। खेलते समय यह पैसे बच्ची को दिखाई दिए और उसने उन्हें उठाकर अपनी जेब में रख लिया।
बताया जा रहा है कि कुछ अन्य बच्चों ने यह घटना देख ली और बच्ची को पकड़कर महिला टीचर के पास ले गए। इसके बाद टीचर ने पहले बच्ची को डांटा और फिर डंडे से उसकी पिटाई शुरू कर दी।
मां का आरोप है कि शिक्षिका ने बच्ची की पीठ पर लगातार कई डंडे मारे, जिससे उसकी पीठ पर गहरे घाव हो गए। छुट्टी के बाद जब बच्ची घर पहुंची तो वह रो रही थी। परिवार ने जब वजह पूछी तो उसने पूरी घटना बताई।
बच्ची की मां ने बताया कि जब उन्होंने बेटी की पीठ देखी तो वहां लाल और नीले रंग के गंभीर निशान थे। कुछ जगहों पर सूजन और घाव भी बन गए थे। यह देखकर परिवार के लोग तुरंत स्कूल पहुंचे और शिक्षिका से जवाब मांगा।
परिजनों का कहना है कि एक छोटी सी गलती के लिए इतनी क्रूर सजा देना बिल्कुल गलत है। बच्ची मानसिक रूप से भी काफी डरी हुई है और स्कूल जाने से घबरा रही है।
घटना के बाद पीड़िता की मां ने सेवर थाने में मामला दर्ज करवाया। उन्होंने पुलिस से आरोपी टीचर के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बच्ची के मेडिकल परीक्षण और बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही स्कूल प्रशासन से भी पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी गई है।
इस पूरे मामले पर स्कूल प्रिंसिपल ने अलग बयान दिया है। उनका कहना है कि बच्ची ने दूसरे छात्र के 3 रुपए उठा लिए थे, जिसकी शिकायत टीचर से की गई थी।
प्रिंसिपल के अनुसार शिक्षिका ने केवल “पनिशमेंट” के तौर पर बच्ची के हाथ पर दो डंडे मारे थे। उन्होंने यह भी कहा कि बच्ची की पीठ पर निशान कैसे आए, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।
हालांकि बच्ची के परिजन और स्थानीय लोग प्रिंसिपल के इस बयान से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि चोटें साफ तौर पर गंभीर मारपीट की ओर इशारा कर रही हैं।
घटना के बाद गांव में लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। कई अभिभावकों ने कहा कि स्कूल बच्चों को शिक्षा देने की जगह है, डराने और मारने की नहीं।
हालांकि कुछ ग्रामीणों ने शिक्षिका का बचाव भी किया। उनका कहना है कि टीचर सामान्य तौर पर बच्चों के साथ अच्छा व्यवहार करती हैं और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जा रहे हैं।
यह घटना एक बार फिर स्कूलों में बच्चों के साथ होने वाली हिंसा और कॉर्पोरल पनिशमेंट के मुद्दे को सामने लेकर आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को अनुशासन सिखाने के नाम पर शारीरिक सजा देना कानूनन अपराध है और इससे बच्चों के मानसिक विकास पर भी बुरा असर पड़ता है।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) पहले भी स्कूलों में शारीरिक दंड के खिलाफ सख्त दिशा-निर्देश जारी कर चुका है। इसके बावजूद ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
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