राजस्थान हाईकोर्ट ने एक युगांतकारी फैसले में सदियों पुरानी 'आटा-साटा' (लड़कियों की अदला-बदली) प्रथा को कानूनी और नैतिक रूप से दिवालिया करार दिया है। जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस सुनील बेनीवाल की खंडपीठ ने बीकानेर के एक मामले में फैमिली कोर्ट का फैसला पलटते हुए पीड़ित महिला की तलाक याचिका को स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि बेटी किसी दूसरे बेटे के विवाह की गारंटी या पारस्परिक सौदे की कीमत नहीं हो सकती। बचपन से सामाजिक दबाव में दी गई सहमति को स्वतंत्र सहमति नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह प्रथा बच्चों के मौलिक अधिकारों का खुला उल्लंघन करती है।
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