जयपुर। टोंक रोड स्थित खसरा नम्बर 307 के एक व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स में संचालित “Boss Cafe” को लेकर जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) और निर्माणकर्ता कंपनी के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। JDA द्वारा धारा 32 और 33 के तहत नोटिस जारी किए जाने के बावजूद रूफटॉप रेस्टोरेंट का संचालन जारी रहने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
दस्तावेज़ों के अनुसार JDA ने 08 मई 2026 को कथित अनियमित निर्माण को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसके बाद संबंधित कंपनियों ने JDA अपीलीय अधिकरण में अपील दायर कर अंतरिम राहत प्राप्त की। हालांकि अधिकरण ने मामले में अंतिम निर्णय नहीं दिया है, लेकिन इसके बावजूद रेस्टोरेंट संचालन जारी है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि “Boss Cafe” संचालकों ने खुद JDA ट्रिब्यूनल में प्रस्तुत अपील में स्वीकार किया है कि उनके पास फायर विभाग की NOC उपलब्ध नहीं है। साथ ही अपील में यह भी उल्लेख किया गया है कि जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा रूफटॉप रेस्टोरेंट का नक्शा स्वीकृत नहीं किया गया है।
इसके बावजूद रेस्टोरेंट, बार और क्लब गतिविधियों का संचालन होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। आखिर बिना फायर NOC और बिना स्वीकृत रूफटॉप मानचित्र के व्यावसायिक गतिविधियां किस आधार पर संचालित हो रही हैं? यदि किसी प्रकार की दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी कौन तय करेगा?
स्थानीय सूत्रों के अनुसार “Boss Cafe” को लेकर देर रात तक शराब पार्टियां आयोजित होने की शिकायतें भी कई बार संबंधित विभागों तक पहुंच चुकी हैं। आसपास के लोगों का आरोप है कि देर रात तक तेज आवाज में म्यूजिक, शराब पार्टी और भीड़भाड़ से क्षेत्र का माहौल प्रभावित हो रहा है, लेकिन शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि “स्टे” या अंतरिम राहत का अर्थ केवल तत्काल ध्वस्तीकरण या कठोर कार्रवाई पर अस्थायी रोक होता है, न कि निर्माण या संचालन को वैध घोषित करना। ऐसे में यदि आवश्यक अनुमतियां और सुरक्षा मानक पूरे नहीं हैं तो संबंधित विभाग अलग से कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रभावशाली व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए नियम अलग हैं? क्या आम नागरिकों पर तुरंत कार्रवाई और बड़े कारोबारियों को राहत देने की दोहरी व्यवस्था चल रही है?
अब देखने वाली बात होगी कि JDA, फायर विभाग और प्रशासन इस मामले में सख्त कार्रवाई करते हैं या फिर “Boss Cafe” का मामला केवल नोटिस, अपील और स्टे तक ही सीमित रह जाएगा।
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