राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के करजू और रावतपुरा गांवों में किसानों ने आधुनिक मल्चिंग तकनीक अपनाकर नकदी फसलों की खेती शुरू की है। इस तकनीक के तहत खेतों में उठी हुई क्यारियां बनाकर ड्रिप सिंचाई लाइन बिछाई जाती है और उस पर विशेष प्लास्टिक मल्चिंग शीट लगाई जाती है। इसके बाद तय दूरी पर छेद कर टमाटर, मिर्च सहित अन्य नकदी फसलों के पौधे लगाए जाते हैं।
किसान जगदीश धाकड़ और लाला धाकड़ ने बताया कि खरीफ और रबी फसलों में अपेक्षित लाभ नहीं मिलने के बाद अब गर्मी के मौसम में नकदी फसलों से अच्छी आमदनी की उम्मीद है। किसानों के अनुसार मल्चिंग तकनीक से 30 से 40 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है और खरपतवार की समस्या भी कम हो जाती है।
ड्रिप इरिगेशन प्रणाली के जरिए पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचता है, जिससे मिट्टी में लंबे समय तक नमी बनी रहती है और फसल उत्पादन बेहतर होने की संभावना बढ़ जाती है। किसानों का कहना है कि नई तकनीकों के इस्तेमाल से खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।
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