नई दिल्ली में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रसिद्ध भपंग वादक गफरुद्दीन मेवाती जोगी, अलगोजा वादक तगाराम भील और समाजसेवी संत स्वामी ब्रह्मदेव महाराज को पद्मश्री प्रदान किया।
डीग जिले के कैथवाड़ा गांव में जन्मे गफरुद्दीन मेवाती जोगी ने मेवात और ब्रज क्षेत्र की लोक परंपराओं को जीवित रखा। उन्होंने महाभारत, लोक रामायण, शिव विवाह और कृष्ण लीला जैसी मौखिक लोक परंपराओं को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाया और करीब 20 विलुप्त होती लोक वाद्य परंपराओं को संरक्षित किया।
जैसलमेर जिले के मूलसागर गांव के तगाराम भील ने थार के पारंपरिक वाद्य अलगोजा को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। बचपन से ही लोक संगीत से जुड़े तगाराम ने अपने पिता से अलगोजा बजाना सीखा और स्वतंत्रता दिवस समारोह 1981 में प्रस्तुति देने के बाद राष्ट्रीय पहचान प्राप्त की।
श्री गंगानगर के स्वामी ब्रह्मदेव महाराज लंबे समय से दिव्यांग और जरूरतमंद बच्चों के उत्थान के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने शिक्षा, सेवा और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के जरिए समाज में अलग पहचान बनाई और उनके प्रयासों से अनेक बच्चों को शिक्षा और बेहतर जीवन का अवसर मिला।
राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में 2026 के पहले चरण के पद्म पुरस्कार प्रदान किए गए। इस दौरान 2 पद्म विभूषण, 6 पद्म भूषण और 58 पद्मश्री पुरस्कार दिए गए। शेष पुरस्कार विजेताओं को दूसरे चरण में सम्मानित किया जाएगा।
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