जोधपुर। राजस्थान कर (GST) विभाग ने फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के खिलाफ कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए बुधवार को जोधपुर शहर के सरदारपुरा स्थित एक प्रसिद्ध मिठाई व्यवसायी के प्रतिष्ठान पर निरीक्षण और जांच की। इससे पहले इसी प्रकार की कार्रवाई एक चर्चित मिर्चीबड़ा विक्रेता के यहां भी की गई थी।
अधिकारियों का कहना है कि व्यवसायी के रिकॉर्ड, खरीद-बिक्री विवरण और GST रिटर्न की गहन जांच की जा रही है। फर्जी या अतिरिक्त लिए गए ITC की गणना कर उसे रिवर्स करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। संबंधित व्यवसायी मिठाई और नमकीन के साथ रेस्तरां का संचालन भी करता है। GST नियमों के अनुसार रेस्तरां सेवा पर 5 प्रतिशत कर लागू होता है और इस श्रेणी के कारोबारियों को ITC का लाभ लेने की अनुमति नहीं है। विभाग यह भी देख रहा है कि कहीं रेस्तरां से जुड़े खर्चों पर अनुचित तरीके से ITC तो नहीं लिया गया।
सूत्रों के अनुसार, जांच दल ने विभिन्न बिलों, खरीद संबंधी दस्तावेजों और कर भुगतान रिकॉर्ड का मिलान शुरू कर दिया है। विभाग यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि घोषित कारोबार और वास्तविक लेन-देन में कोई अंतर तो नहीं है। यदि कोई अनियमितता सामने आती है, तो नियमानुसार कर वसूली, ब्याज और जुर्माने की कार्रवाई की जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान में कई करदाता लंबे समय से फर्जी या गलत ITC क्लेम कर रहे हैं। हालांकि विभाग समय रहते इन गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी नहीं रख पा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि GST पोर्टल और विभागीय डेटा एनालिटिक्स का सही उपयोग किया जाए, तो इस प्रकार की अनियमितताओं को शुरुआती स्तर पर ही पकड़ा जा सकता है। तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था मजबूत होने से कर चोरी और फर्जी दावों पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।
राजस्थान GST विभाग की यह पहल फर्जी ITC के माध्यम से राजस्व को होने वाले नुकसान को रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से चलाई जा रही है। इस कार्रवाई से व्यवसायियों और करदाताओं को संदेश मिलेगा कि नियमों का पालन अनिवार्य है और किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता पर विभाग कार्रवाई करेगा।
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