आज बिना मुहूर्त शादी! अक्षय तृतीया 2026 का राज जानिए—क्यों माना जाता है साल का सबसे शुभ दिन

आज: यानी 20 अप्रैल 2026 को देशभर में Akshaya Tritiya का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में इस दिन को अत्यंत शुभ माना जाता है और इसे “अबूझ मुहूर्त” की श्रेणी में रखा गया है। इसका अर्थ है कि इस दिन बिना किसी विशेष पंचांग या मुहूर्त देखे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ जैसे सभी मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं।

क्यों खास है अक्षय तृतीया?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन जो भी शुभ कार्य किया जाता है, उसका फल “अक्षय” यानी कभी समाप्त न होने वाला होता है। यही कारण है कि इसे समृद्धि, सौभाग्य और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

इस तिथि को भगवान Parashurama का प्राकट्य दिवस भी माना जाता है। उन्हें अजर-अमर और अक्षय स्वरूप का प्रतीक बताया गया है, जिससे इस दिन की महत्ता और बढ़ जाती है।

बिना मुहूर्त शादी क्यों संभव?

आमतौर पर शादी जैसे शुभ कार्यों के लिए ज्योतिषीय गणना के आधार पर विशेष मुहूर्त तय किए जाते हैं। लेकिन अक्षय तृतीया एक ऐसा दिन है, जब ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति अपने आप में शुभ मानी जाती है। इसलिए इस दिन किसी अतिरिक्त गणना की जरूरत नहीं होती।

इसी वजह से देशभर में हजारों शादियां इस दिन आयोजित होती हैं। खासकर ग्रामीण और पारंपरिक समाज में इस दिन विवाह का विशेष महत्व है।

सोना खरीदने की परंपरा का रहस्य

अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना भी बेहद शुभ माना जाता है। वैदिक ग्रंथ Rigveda में सोने को “हिरण्य” कहा गया है, जिसका अर्थ है चमकदार और अमूल्य धातु।

मान्यता है कि सोने की उत्पत्ति सूर्य के तेज से हुई है, इसलिए यह ऊर्जा, समृद्धि और अमरत्व का प्रतीक माना जाता है। इस दिन खरीदा गया सोना घर में सुख-समृद्धि और आर्थिक स्थिरता लाता है।

चारधाम यात्रा की शुरुआत

अक्षय तृतीया के दिन उत्तराखंड स्थित Gangotri Temple और Yamunotri Temple के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाते हैं। इसी के साथ चारधाम यात्रा की औपचारिक शुरुआत होती है।

इस वर्ष तिथियों के अंतर के कारण कपाट 19 अप्रैल को ही खोल दिए गए, लेकिन 20 अप्रैल को तृतीया तिथि में सूर्योदय होने के कारण आज का दिन अधिक शुभ माना जा रहा है।

पुरी और दक्षिण भारत में विशेष आयोजन

ओडिशा के Jagannath Temple में इस दिन से प्रसिद्ध “चंदन यात्रा” उत्सव की शुरुआत होती है। इसमें भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को चंदन का लेप लगाया जाता है, जिससे उन्हें गर्मी से राहत मिलती है।

वहीं आंध्र प्रदेश के Simhachalam Temple में साल में सिर्फ एक बार अक्षय तृतीया के दिन भगवान नृसिंह की प्रतिमा से चंदन का लेप हटाया जाता है। इस दिन भक्तों को भगवान के वास्तविक स्वरूप के दर्शन होते हैं, जो बेहद दुर्लभ माना जाता है।

दान-पुण्य और आध्यात्मिक महत्व

अक्षय तृतीया को दान-पुण्य के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन अन्न, वस्त्र, जल और धन का दान करने से कई गुना पुण्य प्राप्त होता है।

धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गंगा और यमुना में स्नान करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति मिलती है।

2026 में शादी के अन्य मुहूर्त

हालांकि अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त माना जाता है, लेकिन इसके अलावा भी वर्ष 2026 में कई शुभ विवाह मुहूर्त उपलब्ध हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मई, जून और नवंबर-दिसंबर के महीनों में भी कई अच्छे विवाह योग बन रहे हैं।


निष्कर्ष:

अक्षय तृतीया सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, समृद्धि और शुभ शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन बिना मुहूर्त के विवाह जैसे बड़े निर्णय लेना भारतीय परंपरा की खास पहचान है।

चाहे सोना खरीदना हो, दान करना हो या नई शुरुआत करनी हो—Akshaya Tritiya हर रूप में जीवन में सकारात्मकता और समृद्धि लाने का संदेश देता है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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