अब बिना लाइसेंस दूध बेचना पड़ेगा भारी: सरकार का सख्त नियम लागू, जानिए कौन होगा बाहर बाजार से

देशभर: में दूध की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच अब सरकार ने सख्त कदम उठाया है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने साफ कर दिया है कि बिना रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस के दूध बेचना अब पूरी तरह गैरकानूनी होगा।

इस नए नियम के तहत छोटे विक्रेताओं से लेकर बड़े डेयरी कारोबारियों तक सभी के लिए पंजीकरण या लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया है। नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना, माल जब्ती और कारोबार बंद करने जैसी सख्त कार्रवाई हो सकती है।

टर्नओवर के आधार पर बदली लाइसेंस व्यवस्था

एफएसएसएआई ने लाइसेंस प्रणाली को कारोबार के आकार के अनुसार तीन हिस्सों में बांटा है:

  • ₹1.5 करोड़ तक टर्नओवर: केवल रजिस्ट्रेशन जरूरी, फीस ₹100
  • ₹1.5 करोड़ से ₹50 करोड़ तक: स्टेट लाइसेंस अनिवार्य
  • ₹50 करोड़ से अधिक: सेंट्रल लाइसेंस लेना जरूरी

पहले यह सीमा सिर्फ ₹12 लाख थी, जिसे अब बढ़ाकर ₹1.5 करोड़ कर दिया गया है। इससे छोटे विक्रेताओं को राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन निगरानी पहले से ज्यादा सख्त होगी।

किन पर लागू होंगे ये नियम?

ये नियम डेयरी यूनिट, दूध उत्पादक, सप्लायर और खुले में दूध बेचने वाले सभी विक्रेताओं पर लागू होंगे। यानी अब गली-मोहल्लों में बिना किसी रजिस्ट्रेशन के दूध बेचने वालों पर भी कार्रवाई हो सकती है।

राजस्थान में दूध का बड़ा बाजार

राजस्थान में हर दिन करीब 1000 लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है। इसमें से आधा यानी 500 लाख लीटर घरों में खपत हो जाता है, जबकि बाकी 500 लाख लीटर बाजार में बेचा जाता है।

सबसे चिंता की बात यह है कि बाजार में आने वाले दूध का बड़ा हिस्सा—करीब 400 लाख लीटर—खुले में बेचा जाता है, जहां मिलावट का खतरा सबसे ज्यादा होता है।

सहकारी और निजी डेयरियां मिलकर करीब 100 लाख लीटर दूध बेचती हैं। इनमें सरस, अमूल, मदर डेयरी, कोटा फ्रेश और पतंजलि जैसी कंपनियां शामिल हैं।

मिलावटी दूध का खतरनाक सच

राज्य में दूध की गुणवत्ता को लेकर किए गए परीक्षणों ने चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं। पिछले दो वर्षों में 1922 सैंपलों में से 427 सैंपल फेल पाए गए।

  • 396 सैंपल सब-स्टैंडर्ड थे
  • 25 सैंपल ‘अनसेफ’ यानी स्वास्थ्य के लिए खतरनाक पाए गए

विशेषज्ञों का कहना है कि मिलावटी दूध लंबे समय में शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक होता है। इसमें इस्तेमाल होने वाले केमिकल, डिटर्जेंट और अन्य पदार्थ लीवर, किडनी, आंखों और हड्डियों को नुकसान पहुंचाते हैं।

कुछ मामलों में अफ्लाटॉक्सिन जैसे तत्व कैंसर और लीवर सिरोसिस का कारण भी बन सकते हैं।

मिलावट के आम तरीके

दूध में मिलावट दो तरह से की जाती है:

  • सब-स्टैंडर्ड: पानी मिलाना, फैट निकालना, स्टार्च या अरारोट मिलाना
  • अनसेफ: डिटर्जेंट, कास्टिक सोडा, तेल, शुगर या हाइड्रोजन पेरॉक्साइड मिलाना

घर पर ऐसे पहचानें मिलावटी दूध

विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ आसान तरीकों से घर पर भी दूध की शुद्धता जांची जा सकती है:

  • चिकनी सतह पर दूध की बूंद डालें: धीरे बहे तो शुद्ध, तेजी से बहे तो शक
  • उबालने पर मोटी मलाई बने तो दूध अच्छा है
  • ज्यादा झाग बने तो डिटर्जेंट की मिलावट हो सकती है
  • आयोडीन डालने पर नीला रंग आए तो स्टार्च मौजूद है

नए नियम से क्या होगा असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होने से हर विक्रेता की पहचान तय होगी। इससे निगरानी बढ़ेगी और दूध की गुणवत्ता में सुधार आने की उम्मीद है।

सरकार का यह कदम उपभोक्ताओं को सुरक्षित और शुद्ध दूध उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।


निष्कर्ष:

दूध जैसे जरूरी खाद्य पदार्थ में मिलावट को रोकने के लिए यह नया नियम अहम साबित हो सकता है। रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस की अनिवार्यता से न सिर्फ फर्जी विक्रेताओं पर लगाम लगेगी, बल्कि आम लोगों को सुरक्षित दूध मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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