धौलपुर में नदी बनी मौत का कुंड: दोस्तों को बचाने कूदे 3 मासूम, तीनों की दर्दनाक डूबकर मौत

राजस्थान: के धौलपुर जिले से एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है, जिसने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया। पार्वती नदी में नहाने गए तीन मासूम बच्चों की डूबने से मौत हो गई। यह हादसा मनिया थाना क्षेत्र के गडाईच गांव में रविवार को हुआ, जहां छुट्टी का दिन बच्चों के लिए खुशियां लेकर नहीं बल्कि मातम बनकर आया।

जानकारी के अनुसार, गांव के एक दर्जन से अधिक बच्चे गर्मी से राहत पाने के लिए नदी किनारे पहुंचे थे। शुरुआत में माहौल पूरी तरह से मस्ती भरा था—बच्चे खेल रहे थे, हंस रहे थे और पानी में नहा रहे थे। लेकिन कुछ ही देर में यह खुशी चीख-पुकार में बदल गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, खेल-खेल में कुछ बच्चे नदी के किनारे से दूर गहरे पानी की ओर चले गए। अचानक जब उन्हें अपनी स्थिति का एहसास हुआ, तो उन्होंने मदद के लिए जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया। किनारे पर मौजूद अन्य बच्चे घबरा गए और मदद के लिए पुकारने लगे।

इसी दौरान 12 वर्षीय भूरा, 12 वर्षीय सोनम और 14 वर्षीय निशु ने साहस दिखाते हुए अपने साथियों को बचाने के लिए नदी में छलांग लगा दी। तीनों बच्चों ने बिना किसी डर के गहरे पानी में उतरकर अपने दोस्तों की जान बचाने की कोशिश की। लेकिन नदी की गहराई और तेज बहाव उनके साहस पर भारी पड़ गया।

दूसरों को बचाने की कोशिश में ये तीनों मासूम खुद भी पानी की गहराइयों में समा गए। यह दृश्य वहां मौजूद बच्चों और ग्रामीणों के लिए बेहद भयावह था। कुछ ही पलों में खुशियों का माहौल मातम में बदल गया।

घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर बच्चों को तलाशने की कोशिश शुरू की। साथ ही पुलिस को भी सूचना दी गई। कुछ ही देर में मनिया थाना पुलिस और स्थानीय गोताखोरों की टीम मौके पर पहुंची।

रेस्क्यू ऑपरेशन काफी चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि नदी का बहाव तेज था और पानी गहरा था। काफी मशक्कत के बाद गोताखोरों ने तीनों बच्चों के शवों को नदी से बाहर निकाला। यह दृश्य देखकर मौके पर मौजूद परिजनों और ग्रामीणों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया है। मामले की जांच कर रहे अधिकारी खलील अहमद (सीओ) ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह हादसा प्रतीत हो रहा है, जो गहरे पानी में जाने के कारण हुआ। हालांकि, पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है।

इस हादसे के बाद पूरे गडाईच गांव में शोक की लहर है। जिन घरों में सुबह तक बच्चों की हंसी गूंज रही थी, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में मातम का माहौल बना हुआ है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि नदी किनारे सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके। खासकर गर्मियों के मौसम में जब बच्चे बड़ी संख्या में नदियों और तालाबों में नहाने जाते हैं, तब सुरक्षा व्यवस्था और जागरूकता बेहद जरूरी हो जाती है।

यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि थोड़ी सी लापरवाही कैसे बड़ी त्रासदी में बदल सकती है। साथ ही, इन तीनों बच्चों की बहादुरी भी हमेशा याद रखी जाएगी, जिन्होंने दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी।


निष्कर्ष:

धौलपुर का यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक गहरी सीख भी है। बच्चों की सुरक्षा, जागरूकता और निगरानी बेहद जरूरी है। वहीं, तीनों मासूमों की बहादुरी हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगी।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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