राजधानी: जयपुर से एक अहम कानूनी फैसला सामने आया है, जिसमें सोशल मीडिया पर किए गए व्यवहार को वैवाहिक क्रूरता की श्रेणी में माना गया है। Family Court Jaipur ने एक 10 साल पुरानी शादी को समाप्त करते हुए कहा कि किसी अन्य पुरुष के साथ रोमांटिक तस्वीरें पोस्ट करना और उन पर ‘आई लव यू जान’ जैसे कमेंट्स आना, पति के प्रति मानसिक क्रूरता है।
यह फैसला 17 अप्रैल को सुनाया गया, जिसमें कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तरह की गतिविधियां न केवल वैवाहिक विश्वास को तोड़ती हैं, बल्कि यह विवाह संस्था का अपमान भी हैं। कोर्ट ने कहा कि भले ही वह व्यक्ति रिश्तेदार या दोस्त ही क्यों न हो, सार्वजनिक रूप से इस प्रकार की नजदीकी दर्शाना अनुचित है।
मामले में पति ने अदालत में तलाक की याचिका दाखिल की थी। उसने आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही पत्नी का व्यवहार उसके प्रति सामान्य नहीं था और 2017 से दोनों अलग रह रहे थे। पति ने यह भी कहा कि उसकी पत्नी का किसी अन्य व्यक्ति के साथ संबंध है, जिसे उसने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए साबित करने की कोशिश की।
पति ने अदालत में पत्नी की कुछ तस्वीरें पेश कीं, जिनमें वह एक अन्य पुरुष के साथ रोमांटिक अंदाज में दिखाई दे रही थी। इन तस्वीरों पर उस पुरुष द्वारा ‘आई लव यू जान’ जैसे कमेंट्स भी किए गए थे। पति का दावा था कि यह सब उसके लिए मानसिक पीड़ा और अपमान का कारण बना।
इसके जवाब में पत्नी ने कहा कि तस्वीरें उसकी हैं, लेकिन जिस सोशल मीडिया अकाउंट से वे पोस्ट की गईं, वह उसका नहीं है। हालांकि, अदालत ने इस दलील को पर्याप्त नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि यदि अकाउंट उसका नहीं था, तो उसे इस संबंध में पुलिस में शिकायत करनी चाहिए थी, जिसका कोई प्रमाण पेश नहीं किया गया।
पत्नी ने यह भी कहा कि जिस व्यक्ति के साथ उसकी तस्वीरें हैं, वह उसका रिश्तेदार (जीजा) है। लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को भी खारिज करते हुए कहा कि यदि ऐसा था, तो उसे उस व्यक्ति को गवाही के लिए पेश करना चाहिए था, जो उसने नहीं किया।
अदालत ने पति द्वारा प्रस्तुत अन्य साक्ष्यों को भी महत्वपूर्ण माना। इनमें मोबाइल चैट और मैसेज शामिल थे, जिनसे यह संकेत मिला कि पत्नी पति पर उसके माता-पिता से अलग रहने का दबाव बना रही थी। कोर्ट ने इसे भी मानसिक क्रूरता का हिस्सा माना।
मामले में एक और दिलचस्प पहलू सामने आया, जब कोर्ट ने बताया कि पहले दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से तलाक लेने की इच्छा जताई थी। इसके तहत पति ने 5 लाख रुपए का डिमांड ड्राफ्ट भी जमा कराया था। लेकिन बाद में पत्नी ने बिना किसी ठोस कारण के अपनी सहमति वापस ले ली।
कोर्ट ने इस व्यवहार को “मनमाना और दुर्भावनापूर्ण” बताया और कहा कि इस तरह से सहमति वापस लेना न्याय प्रक्रिया का दुरुपयोग है। पत्नी द्वारा लगाए गए आरोप—जैसे मारपीट, जबरन संबंध और दूसरी शादी—को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया, क्योंकि उनके समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए गए।
अंततः अदालत ने यह निष्कर्ष निकाला कि पत्नी का व्यवहार वैवाहिक संबंधों के प्रति असम्मानजनक और क्रूरता की श्रेणी में आता है। इसलिए विवाह को समाप्त करना उचित है।
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