JDA नियमों की धज्जियां! जगतपुरा में जीरो सेटबैक पर खड़ा हो रहा अवैध कॉम्प्लेक्स, प्रवर्तन विभाग पर मिलीभगत के आरोप

जयपुर: की पॉश कॉलोनियों में शामिल जगतपुरा एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। इस बार मामला जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) के नियमों की खुलेआम अनदेखी और कथित अवैध निर्माण से जुड़ा है। आरोप है कि जगतपुरा के बाल विहार-14, रेलवे कॉलोनी, जोन-9 क्षेत्र में एक रेजिडेंशियल प्लॉट पर जीरो सेटबैक रखते हुए बहुमंजिला कमर्शियल निर्माण किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य तेजी से जारी है, लेकिन जेडीए का प्रवर्तन विभाग आंखें मूंदे बैठा है।

मामले ने अब प्रशासनिक पारदर्शिता, शहरी नियोजन और नियमों के पालन पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में पूरे क्षेत्र की प्लानिंग और ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

क्या है पूरा मामला?

सूत्रों के मुताबिक, जिस प्लॉट पर निर्माण हो रहा है वह मूल रूप से रेजिडेंशियल उपयोग के लिए स्वीकृत है। इसके बावजूद वहां कमर्शियल उपयोग को ध्यान में रखते हुए बहुमंजिला ढांचा तैयार किया जा रहा है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि निर्माण में सेटबैक नियमों का पालन नहीं किया जा रहा।

JDA बिल्डिंग बायलॉज के अनुसार किसी भी भवन निर्माण में चारों ओर निर्धारित खाली जगह यानी सेटबैक रखना अनिवार्य होता है। इसका उद्देश्य सुरक्षा, वेंटिलेशन, फायर एक्सेस और ट्रैफिक प्रबंधन सुनिश्चित करना होता है। लेकिन यहां कथित तौर पर जीरो सेटबैक पर निर्माण किया जा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य कई दिनों से लगातार जारी है और निर्माण की ऊंचाई भी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन अब तक न तो कोई नोटिस चस्पा किया गया और न ही निर्माण रुकवाने की कार्रवाई दिखाई दी।

प्रवर्तन विभाग की भूमिका पर उठे सवाल

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा सवाल JDA के प्रवर्तन विभाग (Enforcement Wing) पर उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इतने बड़े स्तर पर निर्माण बिना प्रशासनिक जानकारी के संभव ही नहीं है।

लोग पूछ रहे हैं कि यदि यह निर्माण अवैध है तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है, या फिर किसी दबाव अथवा कथित मिलीभगत के चलते आंखें मूंद ली गई हैं?

कुछ स्थानीय सामाजिक संगठनों ने दावा किया है कि उन्होंने मौखिक और लिखित शिकायतें भी कीं, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इससे आम लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

शहर की प्लानिंग पर खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रेजिडेंशियल क्षेत्रों में इस तरह कमर्शियल और बहुमंजिला निर्माण अनियंत्रित तरीके से होने लगे तो इससे पूरे इलाके की मूल योजना बिगड़ सकती है।

जीरो सेटबैक पर निर्माण होने से फायर सेफ्टी को बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। साथ ही पार्किंग संकट, ट्रैफिक जाम और जल निकासी जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। भविष्य में यह क्षेत्र दुर्घटनाओं और अव्यवस्थित विकास का केंद्र बन सकता है।

शहरी विकास विशेषज्ञों के अनुसार, यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो यह मामला अन्य अवैध निर्माण करने वालों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।

स्थानीय लोगों में आक्रोश

क्षेत्र के निवासियों का कहना है कि आम नागरिक अगर घर की बालकनी भी नियमों से बाहर बनाते हैं तो JDA तुरंत नोटिस भेज देता है, लेकिन यहां खुलेआम बहुमंजिला निर्माण होने के बावजूद प्रशासन चुप है।

लोगों ने मांग की है कि:

  • निर्माण कार्य तुरंत रोका जाए
  • मौके पर तकनीकी जांच कराई जाए
  • जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच हो
  • यदि नियमों का उल्लंघन साबित हो तो निर्माण सील किया जाए

स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे सामूहिक रूप से विरोध प्रदर्शन करेंगे।

क्या कहते हैं नियम?

जेडीए नियमों के तहत किसी भी रेजिडेंशियल प्लॉट पर व्यावसायिक उपयोग और अतिरिक्त निर्माण के लिए विशेष अनुमति जरूरी होती है। सेटबैक नियमों का उल्लंघन गंभीर श्रेणी में माना जाता है। ऐसे मामलों में प्राधिकरण को निर्माण रुकवाने, सीलिंग और ध्वस्तीकरण तक की कार्रवाई का अधिकार है।

हालांकि, इस मामले में अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।


निष्कर्ष:

जगतपुरा का यह मामला केवल एक अवैध निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही और शहरी विकास व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह स्पष्ट संकेत होगा कि नियमों का पालन कराने वाली एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर समीक्षा की जरूरत है। अब सबकी नजर JDA प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी है।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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