राजस्थान: की राजधानी जयपुर से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक महिला ने अपने 8 साल के मासूम बेटे को गोद में लेकर ट्रेन के आगे छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। इस भयावह घटना के बाद रेलवे ट्रैक पर मां-बेटे के शव क्षत-विक्षत हालत में पड़े मिले। घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। वहीं मृतका के परिजनों ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि लगातार प्रताड़ना से परेशान होकर महिला ने यह कदम उठाया।
यह मामला जयपुर के मालपुरा गेट थाना क्षेत्र स्थित शिकारपुरा फाटक के पास का है। शनिवार देर शाम करीब 7 बजे रेलवे ट्रैक के पास एक महिला और बच्चे के शव पड़े होने की सूचना पुलिस को मिली। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। दोनों शव बुरी तरह कटे हुए थे और उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा था।
मालपुरा गेट थाना प्रभारी उदयभान यादव ने बताया कि शुरुआती जांच में यह मामला आत्महत्या का लग रहा है। आशंका है कि महिला ने अपने बेटे को गोद में लेकर ट्रेन के सामने छलांग लगा दी। शवों को कब्जे में लेकर महात्मा गांधी हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी में रखवाया गया।
रविवार दोपहर करीब 3 बजे टोंक जिले के पीपलू निवासी भागचंद अपनी बहन और भांजे की गुमशुदगी दर्ज कराने मुहाना थाने पहुंचे। इस दौरान पुलिस ने उन्हें रेलवे ट्रैक पर मिले शवों की तस्वीरें दिखाईं। तस्वीरें देखते ही भागचंद टूट गए और उन्होंने मृतकों की पहचान अपनी बहन रामकन्या बैरवा (32) और उसके 8 वर्षीय बेटे विरेन्द्र के रूप में की।
भागचंद ने बताया कि उनकी बहन रामकन्या की शादी करीब 15 साल पहले रामदयाल बैरवा से हुई थी। दोनों के दो बेटे हैं। बड़ा बेटा फिलहाल अपने ननिहाल में रहता है। उन्होंने आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही उनकी बहन को ससुराल में प्रताड़ित किया जाता था।
परिजनों के मुताबिक, रामदयाल शराब पीकर आए दिन रामकन्या से मारपीट करता था। घरेलू झगड़ों के कारण रामकन्या कई बार मायके आ चुकी थी। करीब एक महीने पहले भी वह मायके चली गई थी, लेकिन 15 दिन पहले ससुराल पक्ष उसे समझाकर वापस ले गया था और भरोसा दिलाया था कि अब उसके साथ मारपीट नहीं होगी।
हालांकि, मायके पक्ष का आरोप है कि ससुराल लौटने के बाद फिर से प्रताड़ना शुरू हो गई। भागचंद ने बताया कि शनिवार शाम करीब 4 बजे रामकन्या अपने छोटे बेटे विरेन्द्र को लेकर घर से निकल गई थी। इसके बाद दोनों का कोई पता नहीं चला।
मृतका के भाई ने यह भी दावा किया कि रामकन्या के ससुर सीताराम ने उनकी बड़ी बहन विमला को फोन पर कहा था कि “अगर रामकन्या मर भी जाएगी तो क्या फर्क पड़ेगा, दूसरी बहू ले आएंगे।” इस बयान ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
परिवार का कहना है कि लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से परेशान होकर रामकन्या ने यह खौफनाक कदम उठाया। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में मातम पसर गया। महात्मा गांधी हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी के बाहर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।
पुलिस ने मृतका के भाई भागचंद की शिकायत पर पति रामदयाल और अन्य ससुरालवालों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर लिया है। सोमवार को मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए।
इस घटना ने घरेलू हिंसा और मानसिक प्रताड़ना जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों को फिर से सामने ला दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि पारिवारिक हिंसा के मामलों में समय रहते कानूनी और सामाजिक मदद मिलना बेहद जरूरी है, ताकि ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।
जयपुर की यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि समाज के सामने खड़ा एक बड़ा सवाल भी है कि आखिर कब तक महिलाएं घरेलू हिंसा और मानसिक प्रताड़ना का शिकार होती रहेंगी।
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