रामदेवरा में रविवार सुबह नई नाड़ी पर जल संरक्षण को लेकर प्रेरक दृश्य देखने को मिला, जहां राजस्थान पत्रिका के अमृतम् जलम् अभियान से जुड़कर बड़ी संख्या में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और पंचायत कार्मिकों ने श्रमदान किया। लगभग दो घंटे तक चले इस अभियान में नाड़ी के पायतन से जमा रेत को निकालकर पाल पर डाला गया, जिससे जलस्रोत की जलधारण क्षमता को पुनः मजबूत किया जा सके।
यह नाड़ी कभी आसपास की ढाणियों के लिए पेयजल का प्रमुख स्रोत हुआ करती थी, लेकिन लंबे समय तक संरक्षण नहीं होने से इसमें रेत भर गई और इसकी क्षमता घटती चली गई थी। अब ग्राम पंचायत और ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास से इसे पुनर्जीवित करने की पहल की गई है।
श्रमदान के दौरान ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए पारंपरिक जलस्रोत को फिर से जीवंत करने में योगदान दिया। ग्राम पंचायत प्रशासक सरपंच समंदरसिंह तंवर ने श्रमदान का शुभारंभ किया, जबकि ग्राम विकास अधिकारी चौथाराम सोलंकी ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। ग्रामीण महिलाओं और पुरुषों ने मिलकर जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कहा कि ऐसे अभियान न केवल जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती प्रदान करते हैं। अंत में आयोजकों ने सभी ग्रामीणों का आभार व्यक्त किया और पारंपरिक जलस्रोतों के संरक्षण में निरंतर सहयोग की अपील की।
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