जयपुर के बहुप्रतीक्षित ₹3000 करोड़ के रिंग रोड मेगा प्रोजेक्ट ने अब रफ्तार पकड़ ली है। वर्षों से अदालतों में लंबित मामलों और भूमि अधिग्रहण से जुड़े विवादों के सुलझने के बाद परियोजना अंतिम चरण में पहुंच गई है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद दिल्ली, आगरा, अजमेर, अहमदाबाद और मुंबई की ओर जाने वाले वाहनों को जयपुर शहर के भीतर प्रवेश नहीं करना पड़ेगा, जिससे राजधानी के ट्रैफिक दबाव में बड़ी कमी आएगी।
परियोजना का दक्षिणी हिस्सा 47 किलोमीटर लंबा है, जबकि 99.35 किलोमीटर लंबी उत्तरी रिंग रोड इस परियोजना का सबसे अहम भाग होगी। यह सड़क जयपुर जिले की 10 तहसीलों और लगभग 150 गांवों से होकर गुजरेगी। आमेर, जमवारामगढ़, बस्सी, चौमूं, कालवाड़ और सांगानेर जैसे क्षेत्रों को इससे सीधा लाभ मिलेगा।
रिंग रोड के निर्माण के बाद दिल्ली से अजमेर की यात्रा में करीब डेढ़ से दो घंटे की बचत होगी, जबकि जयपुर के एक छोर से दूसरे छोर तक का सफर 35 से 40 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। दिल्ली रोड, सीकर रोड, आगरा रोड और अजमेर रोड पर आधुनिक मेगा क्लोवरलीफ फ्लाईओवर बनाए जाएंगे, जिससे बिना रेड लाइट और बिना रुके हाईवे बदलना संभव होगा। फिलहाल प्रशासन किसानों के साथ मुआवजे का फॉर्मूला तय कर रहा है और अगले छह महीनों में भूमि अधिग्रहण पूरा होने के बाद करीब तीन वर्षों में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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