प्रमुख शासन सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्रीमती गायत्री राठौड़ ने बताया कि राज्य सरकार का उद्देश्य आमजन तक केवल सुरक्षित, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण औषधियां पहुंचाना है। इसी कारण औषधि नियंत्रण संगठन नियमित रूप से बाजार से दवा नमूने एकत्र कर उनकी प्रयोगशाला में जांच कराता है।
जांच में अमानक पाए गए नमूनों में सेफिक्सिम विद लैक्टिक एसिड बैसिलस टैबलेट्स, निफेडिपिन सस्टेन्ड रिलीज टैबलेट्स, फॉर्मल्डिहाइड सॉल्यूशन, बेटामेथासोन सोडियम फॉस्फेट इंजेक्शन, मेट्रोनिडाजोल टैबलेट्स, सेफिक्सिम एवं ओफ्लॉक्सासिन डिस्पर्सिबल टैबलेट्स, टैपेंटाडोल हाइड्रोक्लोराइड टैबलेट तथा लेवोसेटिरिजिन डाइहाइड्रोक्लोराइड टैबलेट्स शामिल हैं। ये दवाएं विभिन्न राज्यों के औषधि निर्माताओं से संबंधित हैं।
आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण डॉ. टी. शुभमंगला ने बताया कि एनएसक्यू घोषित सभी दवा नमूनों के संबंध में नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। संबंधित औषधि नियंत्रक अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य में दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए यह अभियान लगातार जारी रहेगा। जो भी निर्माता या संबंधित पक्ष गुणवत्ता मानकों से समझौता करेगा, उसके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी, ताकि प्रदेशवासियों को सुरक्षित और भरोसेमंद दवाएं उपलब्ध हो सकें।
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