एनसीआर से भरतपुर और अलवर के बाहर होने से प्रभावित विकास कार्य और उद्योग

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की सीमा 100 किलोमीटर करने का प्रस्ताव पिछले पांच वर्षों से फाइलों में अटका हुआ है। केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार होने के बावजूद यह प्रस्ताव अभी तक लागू नहीं हो पाया है। इससे एनसीआर के दायरे में आने वाले क्षेत्रों में पाबंदियों का असर विकास कार्यों और उद्योग-धंधों पर पड़ रहा है। एनसीआर में वर्तमान में 22 जिले शामिल हैं: हरियाणा के 13, उत्तर प्रदेश के 7 और राजस्थान के 2 जिले – भरतपुर और अलवर।

17 दिसंबर 2021 को एनसीआर बोर्ड ने 2041 के मास्टर प्लान का ड्राफ्ट मंजूर किया था। इस योजना के अनुसार, दिल्ली के राजघाट से 100 किलोमीटर की दूरी तक एनसीआर का क्षेत्र निर्धारित किया गया था, जो मेरठ तक फैलेगा। इसके लागू होने पर भरतपुर और अलवर एनसीआर से बाहर हो जाएंगे। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का विचार 1991 में क्रियान्वित किया गया था। वर्ष 2013 में भरतपुर और 1991 में अलवर जिले को एनसीआर में शामिल किया गया, ताकि दिल्ली से सटे शहरों को विकसित किया जा सके और राजधानी पर जनसंख्या का दबाव कम किया जा सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि एनसीआर के विकास को सही ढंग से लागू नहीं किया गया, जिससे भरतपुर और अलवर को अपेक्षित लाभ नहीं मिला। इसके कारण पेट्रोल और डीजल महंगे हुए, वाहन रखने की अवधि घट गई, और सरसों तेल उद्योग की नई इकाइयों को एनओसी नहीं मिल पा रही है।

भरतपुर जिले में एनसीआर के नियमों के कारण प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों (बीएस-1, बीएस-2, बीएस-3) पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा हुआ है। दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने पर एनसीआर की गाइडलाइंस और पर्यावरण नियमों के कारण खनन और उससे जुड़े गतिविधियों पर रोक लगती है। विकास कार्य बंद हो जाते हैं, और कठोर नियमों के कारण नए औद्योगिक क्षेत्रों का विकास भी प्रभावित होता है। मेट्रो और बेहतर रेल कनेक्टिविटी जैसी विकास योजनाओं का लाभ जो दिल्ली के आसपास के अन्य एनसीआर जिलों को मिलता है, वह भरतपुर तक नहीं पहुंच पाया।

वर्ष 2021 में केंद्र सरकार की कमेटी और नामित सदस्यों के साथ हुई एनसीआर बोर्ड की बैठक में यह प्रस्ताव स्वीकृत हो चुका है। अब विशेषज्ञ और स्थानीय प्रतिनिधि मानते हैं कि दोनों राज्यों में एक ही पार्टी की सरकार होने का लाभ उठाकर भरतपुर को एनसीआर से बाहर निकालना चाहिए, क्योंकि तब से अब तक यहां कोई नई फैक्ट्री स्थापित नहीं हो पाई और एनसीआर से कोई लाभ भी नहीं मिला।

एनसीआर बोर्ड ने zonal प्लान के लिए टिप्पणी मांगी थी, जिसमें प्रशासन ने उद्योगों के लिए नए क्षेत्र, बेहतर लिंक वे आदि की संभावनाओं को लेकर सुझाव दिए। हालांकि, अन्य प्रस्तावों पर कोई अंतिम निर्णय या अधिसूचना जारी नहीं हुई है, और मामला अभी भी फाइलों में अटका हुआ है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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