झालावाड़ पुलिस ने मुंबई पुलिस के सहयोग से 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया और 10 लड़कियों को बरामद किया, जिनमें से 8 नाबालिग थीं। रैकेट में दलाल कमजोर परिवारों के घरों को निशाना बनाते और बच्चियों को 25 से 35 लाख रुपए में खरीद लेते।
पैसे देने से पहले माता-पिता से स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लिए जाते थे। इसमें लिखा होता कि यदि लड़की भाग जाती है तो पूरे पैसे लौटाने होंगे, और उसकी मौत या आत्महत्या होने पर ही कर्जा माफ होगा। परिवार कानूनी कार्रवाई नहीं कर सकेगा।
मुक्त कराई गई बच्चियों में 5 टोंक और 4 झालावाड़ की रहने वाली हैं। एसपी अमित बुढ़ानिया और महिला अपराध अनुसंधान सेल के एडिशनल एसपी भागचंद के नेतृत्व में एसआईटी ने जांच की और सोशल मीडिया अकाउंट्स ट्रेस किए। मुंबई पुलिस ने कुछ बच्चियों को पीटा के तहत नारी निकेतन भेजा था। पुलिस ने अवैध दस्तावेजों और परिवारों के हस्ताक्षर को पुख्ता सबूत माना है।
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