इन पांच नगर निगमों में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका अहम हो गई है। भाजपा को बहुमत के लिए जरूरी संख्या पूरी करने में निर्दलीयों का समर्थन लेना पड़ सकता है। ऐसे में निर्दलीय पार्षद इन निकायों में 'किंगमेकर' की भूमिका में रहेंगे।
चुनाव परिणामों के बाद प्रदेश के कुल 10 नगर निगमों में से 9 में भाजपा का मेयर बनने की संभावना जताई जा रही है। चार नगर निगमों में पार्टी ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया है, जबकि अन्य पांच नगर निगमों में निर्दलीयों के समर्थन से भाजपा बोर्ड बनाने की स्थिति में है।
इसके अलावा प्रदेश की 22 नगर परिषदों में भाजपा का सभापति बनने की स्थिति बन रही है। कई अन्य नगर परिषदों में भी निर्दलीय पार्षदों के सहयोग से भाजपा बोर्ड बनाने की तैयारी में है।
नगर पालिकाओं के परिणाम भी भाजपा के लिए उत्साह बढ़ाने वाले रहे हैं। प्रदेश की 133 नगर पालिकाओं में भाजपा बोर्ड बनाने की स्थिति में है। इससे साफ है कि शहरी क्षेत्रों में भाजपा को व्यापक समर्थन मिला है।
चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश के विभिन्न शहरों में रोड शो और जनसभाएं की थीं। भाजपा ने सरकार के विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं को चुनावी मुद्दा बनाया। पार्टी नेताओं का दावा है कि मुख्यमंत्री के व्यापक जनसंपर्क अभियान का चुनाव परिणामों पर सकारात्मक असर पड़ा है।
भाजपा की इस जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को बधाई दी है।
शहरी निकाय चुनाव के परिणामों को भाजपा के लिए बड़ी राजनीतिक उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। साथ ही, इस जनादेश के बाद फर्स्ट इंडिया के Exit Poll के अनुमानों पर भी मुहर लगने का दावा किया जा रहा है।
कुल मिलाकर शहरी निकाय चुनाव में भाजपा के प्रदर्शन ने राजस्थान की शहरी राजनीति में पार्टी की मजबूत पकड़ को एक बार फिर सामने ला दिया है। अब निगाहें उन नगर निगमों और निकायों पर हैं, जहां निर्दलीय पार्षद बोर्ड गठन और मेयर-सभापति के चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
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