सियासी डायरी: सांड बना ‘एक दिन का सरपंच’, पंजाब में पायलट की एंट्री और जलमहल की तस्वीर

जयपुर। राजस्थान में निकाय चुनाव के बाद अब पंचायत चुनावों की तैयारियों के बीच स्थानीय मुद्दे और सियासी गतिविधियां चर्चा में हैं। इसी बीच पाली के कुशालपुरा गांव में ग्रामीणों का आवारा पशुओं की समस्या के विरोध का अनोखा तरीका सामने आया। दूसरी ओर कांग्रेस नेता सचिन पायलट की पंजाब में सक्रियता और राजस्थान में कांग्रेस के निकाय चुनाव प्रदर्शन को लेकर भी सियासी चर्चा जारी है। जयपुर के जलमहल की साफ-सफाई का मुद्दा भी एक बार फिर ध्यान खींच रहा है।

1. पंचायत भवन में पहुंचा ‘सांड’, ग्रामीणों ने बनाया एक दिन का सरपंच

पाली के रायपुर क्षेत्र के कुशालपुरा गांव में ग्रामीणों ने आवारा पशुओं की समस्या को लेकर अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीण एक सांड को रस्सियों के सहारे पंचायत भवन तक ले गए और उसे गद्दे पर बैठाकर प्रतीकात्मक तौर पर ‘एक दिन का सरपंच’ बना दिया।

ग्रामीणों ने सांड के लिए चारे-पानी की व्यवस्था की। इस दौरान मौजूद लोगों ने पंचायत और स्थानीय व्यवस्था को लेकर नारे भी लगाए। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में आवारा पशुओं के कारण खेतों और फसलों को नुकसान हो रहा है। इसके अलावा सड़कों और गलियों में पशुओं के घूमने से आवाजाही में भी परेशानी होती है।

ग्रामीणों के मुताबिक, इस समस्या को लेकर पंचायत स्तर पर पहले भी शिकायतें की गई थीं, लेकिन समाधान नहीं होने पर उन्होंने विरोध का यह तरीका अपनाया।

सोशल मीडिया पर सामने आए इस घटनाक्रम ने स्थानीय प्रशासन और पंचायत व्यवस्था के सामने आवारा पशुओं की समस्या को लेकर सवाल जरूर खड़े किए हैं।


2. पंजाब में सचिन पायलट की एंट्री, कांग्रेस के गुट एक मंच पर

कांग्रेस ने 5 सितंबर 2026 को सचिन पायलट को पंजाब का AICC प्रभारी नियुक्त किया था। इसके बाद पंजाब में उनकी पहली राजनीतिक सक्रियता के दौरान पार्टी के अलग-अलग खेमों के वरिष्ठ नेता एक मंच पर नजर आए। 15 सितंबर के विरोध प्रदर्शन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और अन्य वरिष्ठ नेता पायलट के साथ दिखाई दिए। 

यह कार्यक्रम पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के खिलाफ कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के तौर पर आयोजित किया गया था। कांग्रेस ने गुलजार सिंह की मौत के मामले को लेकर कार्रवाई और जांच की मांग उठाई। पायलट ने पंजाब सरकार पर भी कई मुद्दों को लेकर निशाना साधा। 

पंजाब कांग्रेस में चन्नी और वड़िंग खेमों के बीच मतभेद की चर्चा लंबे समय से होती रही है। ऐसे में दोनों नेताओं का एक मंच पर आना पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम रहा। हालांकि, आगे यह एकजुटता किस तरह कायम रहती है, यह आने वाले समय में पार्टी की गतिविधियों से स्पष्ट होगा। 


3. निकाय चुनाव के बाद डोटासरा का फोकस, नतीजों पर उठाए सवाल

राजस्थान के निकाय चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने पार्टी के प्रदर्शन और चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी बात रखी है।

राज्य निर्वाचन आयोग के घोषित परिणामों के अनुसार 10,235 वार्डों में भाजपा ने 4,179, कांग्रेस ने 3,613 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 2,273 वार्ड जीते। भाजपा चार नगर निगमों—जयपुर, उदयपुर, भीलवाड़ा और कोटा—में बहुमत हासिल करने में सफल रही, जबकि कांग्रेस ने बीकानेर नगर निगम में बहुमत हासिल किया।

डोटासरा ने चुनाव परिणामों के संदर्भ में परिसीमन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि परिसीमन का असर कांग्रेस के परिणामों पर पड़ा। यह उनका राजनीतिक आकलन और आरोप है; परिसीमन और उसके प्रभाव को लेकर अलग-अलग राजनीतिक पक्षों की अपनी-अपनी व्याख्याएं हैं। 


4. जलमहल: खूबसूरत तस्वीर के पीछे सफाई का सवाल

जयपुर की पहचान माने जाने वाले जलमहल की खूबसूरती पर्यटकों को आकर्षित करती है, लेकिन मानसागर झील की सफाई और प्रदूषण का मुद्दा लगातार सामने आता रहा है।

अगस्त 2026 की एक रिपोर्ट में जलमहल के आसपास पानी में कचरा, मृत मछलियां और दुर्गंध की समस्या का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक आसपास के नालों से आने वाला प्रदूषित पानी भी झील की स्थिति को प्रभावित करता है। 

जयपुर नगर निगम ने मानसून के दौरान शहर में सफाई व्यवस्था मजबूत करने के लिए विशेष अभियान भी चलाया था, जिसमें कचरा प्रभावित स्थानों और सार्वजनिक क्षेत्रों की सफाई पर फोकस किया गया। 

ऐसे में जलमहल जैसे ऐतिहासिक पर्यटन स्थल की सुंदरता के साथ उसके आसपास की स्वच्छता और झील के पर्यावरण की स्थिति भी अहम मुद्दा बनी हुई है।


5. ‘जादूगर’ की सियासी शैली भी चर्चा में

राजस्थान की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को उनके राजनीतिक अंदाज और लंबे सार्वजनिक जीवन के कारण अक्सर अलग पहचान के साथ देखा जाता है। निकाय चुनाव के दौरान भी गहलोत लगातार सक्रिय रहे और उन्होंने सरकार की नीतियों तथा चुनावी रणनीति को लेकर कई बयान दिए।

निकाय चुनाव के बाद गहलोत ने कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पार्टी को भाजपा के आक्रामक प्रचार का उसी तरह जवाब देना चाहिए था।

सियासी हलकों में गहलोत की सहज शैली और राजनीतिक संवाद का अंदाज हमेशा चर्चा का विषय रहा है। हाल के दिनों में उनके सार्वजनिक कार्यक्रमों और बयानों के वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा में रहे हैं। 

कुल मिलाकर, निकाय चुनाव के बाद राजस्थान की राजनीति अब पंचायत चुनावों की ओर बढ़ रही है। गांवों के स्थानीय मुद्दों से लेकर बड़े नेताओं की राजनीतिक सक्रियता तक, आने वाले दिनों में कई नए सियासी रंग देखने को मिल सकते हैं।

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