कामां। कामां ब्लॉक के महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय (MGGS) लुहेसर में वेतन भुगतान का मामला अब प्रशासनिक विवाद में बदलता नजर आ रहा है। विद्यालय के दो दर्जन से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाओं और अन्य स्टाफ का करीब दो माह से वेतन लंबित होने का दावा किया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि वे नियमित रूप से विद्यालय में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन विभागीय स्तर पर उत्पन्न एक प्रशासनिक विवाद के चलते पूरे स्टाफ को वेतन का इंतजार करना पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि पूरे मामले की शुरुआत शिक्षक ऋषि के स्थानांतरण से जुड़े प्रकरण से हुई। जानकारी के अनुसार, स्थानांतरण के बाद शिक्षक को विद्यालय से रिलीव कर दिया गया था। इसके बाद कथित तौर पर बिना किसी स्पष्ट सक्षम आदेश के उसी विद्यालय में दोबारा जॉइनिंग का मामला सामने आया।
बताया गया है कि कार्यवाहक प्रधानाध्यापिका प्रियंका गुर्जर के अवकाश पर रहने के दौरान कार्यवाहक जिम्मेदारी संभाल रहे शिक्षक गिर्राज ने संबंधित शिक्षक की जॉइनिंग कराई थी। इसके बाद जॉइनिंग की वैधानिकता और विद्यालय के प्रशासनिक संचालन को लेकर स्थिति उलझती चली गई।
मामले में सबसे बड़ी समस्या DDO पावर और वेतन बिल को लेकर सामने आई है। आरोप है कि कार्यवाहक प्रधानाध्यापिका ने स्पष्ट सक्षम आदेश या विभागीय मार्गदर्शन के अभाव में DDO पावर लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद विद्यालय के पूरे स्टाफ का वेतन भुगतान प्रभावित होने की बात सामने आई है।
कर्मचारियों का सवाल है कि यदि किसी एक शिक्षक की जॉइनिंग नियमों के अनुरूप नहीं थी, तो उसके व्यक्तिगत प्रकरण का निस्तारण किया जाना चाहिए था। इसके बजाय पूरे विद्यालय के कर्मचारियों का वेतन क्यों लंबित हुआ, इस पर विभागीय स्तर पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की जा रही है।
विद्यालय स्टाफ के मुताबिक, वेतन भुगतान को लेकर पूर्व में CBEO कार्यालय में ज्ञापन भी दिया जा चुका है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
कर्मचारियों का कहना है कि दो महीने से वेतन नहीं मिलने के कारण घरेलू खर्च, बच्चों की फीस, बैंक की किश्तों और अन्य जरूरी आर्थिक जिम्मेदारियों पर असर पड़ रहा है। उनका कहना है कि जिस प्रशासनिक विवाद में अधिकांश कर्मचारियों की कोई भूमिका नहीं है, उसका आर्थिक असर पूरे स्टाफ पर पड़ रहा है।
मामला केवल शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन तक सीमित नहीं है। विद्यालय में बच्चों के लिए पोषाहार तैयार करने वाली महिलाओं के भुगतान पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
यदि भुगतान में देरी लंबे समय तक जारी रहती है और पोषाहार तैयार करने वाली महिलाएं काम करने में असमर्थता जताती हैं, तो विद्यालय में बच्चों को मिलने वाली मध्याह्न भोजन व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।
पूरे मामले में CBEO कार्यालय, जिला शिक्षा अधिकारी और निदेशालय स्तर पर अधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यदि विद्यालय स्तर पर DDO पावर या किसी नियम को लेकर समस्या थी, तो संबंधित अधिकारियों से तत्काल लिखित मार्गदर्शन लिया जाना चाहिए था।
वहीं, यदि शिक्षक की दोबारा जॉइनिंग सक्षम आदेश के बिना हुई थी, तो उसकी वैधानिकता की जांच कर संबंधित शिक्षक के मामले में अलग से निर्णय लिया जा सकता था। ऐसे में पूरे स्टाफ का वेतन लंबित होने की स्थिति क्यों बनी, इसे लेकर कर्मचारी जवाब मांग रहे हैं।
विद्यालय स्टाफ की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि संबंधित शिक्षक की जॉइनिंग किस आदेश या नियम के तहत हुई, DDO पावर का संचालन क्यों प्रभावित हुआ और वेतन बिल किस स्तर पर लंबित है।
कर्मचारियों का यह भी कहना है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही के कारण पूरे स्टाफ का वेतन अटका है, तो उसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए और लंबित वेतन का जल्द भुगतान कराया जाना चाहिए।
अब कर्मचारियों की नजर CBEO कार्यालय, जिला शिक्षा अधिकारी और शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों की कार्रवाई पर है। मामला जल्द नहीं सुलझा तो यह विवाद विद्यालय के प्रशासनिक संचालन के साथ-साथ विद्यार्थियों की व्यवस्थाओं को भी प्रभावित कर सकता है।
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