विधानसभा चुनाव अभी करीब दो साल दूर हैं, लेकिन बीजेपी ने संगठन को लगातार सक्रिय रखने की रणनीति के तहत इन सीटों पर जमीनी स्तर पर काम शुरू कर दिया है। पार्टी की नजर खास तौर पर जयपुर, भरतपुर, बीकानेर और उदयपुर संभागों से जुड़ी 113 विधानसभा सीटों और 13 लोकसभा क्षेत्रों पर है।
पार्टी के आंतरिक आकलन के मुताबिक प्रदेश की 200 विधानसभा सीटों में से 113 सीटों को संगठनात्मक दृष्टि से कमजोर या चुनौतीपूर्ण श्रेणी में रखा गया है। इन्हीं सीटों पर अब प्रवासी कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी गई है।
इन कार्यकर्ताओं का मुख्य उद्देश्य स्थानीय संगठन की स्थिति का आकलन करना, बूथ स्तर की सक्रियता की जानकारी लेना और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय को मजबूत करना है। प्रवासी कार्यकर्ता अपनी रिपोर्ट सीधे प्रदेश संगठन के वरिष्ठ नेतृत्व तक पहुंचाएंगे।
प्रवासी कार्यकर्ताओं की तैनाती वाले प्रमुख विधानसभा क्षेत्रों में नोखा, सुजानगढ़, झुंझुनूं, मंडावा, नवलगढ़, फतेहपुर, लक्ष्मणगढ़, दांतारामगढ़, कोटपूतली, आमेर, बस्सी, राजगढ़-लक्ष्मणगढ़, बाड़ी, टोडाभीम, सपोटरा, सिकराय, लालसोट, बागीदौरा, पीलीबंगा, भादरा, सरदारशहर, चूरू, उदयपुरवाटी, धोद, सीकर, नीमकाथाना, श्रीमाधोपुर, तिजारा, मुंडावर, बानसूर, अलवर ग्रामीण, कामां, डीग-कुम्हेर, वैर, राजाखेड़ा, हिंडौन, करौली, बांदीकुई, महुवा, दौसा, गंगापुर सिटी, बामनवास, सवाई माधोपुर, डूंगरपुर, आसपुर, सागवाड़ा, चौरासी, घाटोल, गढ़ी, बांसवाड़ा और कुशलगढ़ सहित कई सीटें शामिल हैं।
बीजेपी ने दौसा लोकसभा क्षेत्र की सभी विधानसभा सीटों को भी अपने फोकस में रखा है। इनमें दौसा, बांदीकुई, लालसोट, महुवा और सिकराय विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं।
दौसा लोकसभा क्षेत्र से वर्तमान में कांग्रेस के सांसद हैं। पार्टी के आकलन में क्षेत्र के सामाजिक समीकरणों और राजनीतिक परिस्थितियों को चुनौतीपूर्ण माना जाता है। हालांकि विधानसभा स्तर पर वर्तमान राजनीतिक स्थिति अलग है और इन क्षेत्रों में बीजेपी के विधायक भी हैं।
भरतपुर लोकसभा क्षेत्र की सभी विधानसभा सीटों को भी बीजेपी ने अपने संगठनात्मक फोकस में रखा है। पार्टी इन क्षेत्रों में संगठन को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
वहीं बांसवाड़ा-डूंगरपुर आदिवासी बेल्ट को भी बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र माना गया है। यहां भारतीय आदिवासी पार्टी (BAP) और कांग्रेस की राजनीतिक मौजूदगी को देखते हुए बीजेपी संगठनात्मक स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
झुंझुनूं लोकसभा क्षेत्र की सभी विधानसभा सीटें भी इस अभियान में शामिल हैं। यहां से वर्तमान में कांग्रेस सांसद हैं।
इसी तरह अलवर लोकसभा क्षेत्र की सभी विधानसभा सीटों को भी पार्टी ने अपने फोकस में रखा है। इसमें अलवर की शहरी विधानसभा सीट भी शामिल है। हालांकि लोकसभा स्तर पर यहां बीजेपी का सांसद है।
सीकर लोकसभा क्षेत्र की सभी विधानसभा सीटों को भी चुनौतीपूर्ण माना गया है। सीकर से वर्तमान में कांग्रेस के समर्थन से CPM के सांसद हैं। वहीं चूरू लोकसभा क्षेत्र की सभी विधानसभा सीटों पर भी बीजेपी ने संगठनात्मक सक्रियता बढ़ाई है। चूरू से वर्तमान में कांग्रेस सांसद हैं।
विधानसभा प्रवासी संबंधित विधानसभा क्षेत्र के स्थायी निवासी नहीं होते हैं। संगठन उन्हें विशेष जिम्मेदारी देकर दूसरे विधानसभा क्षेत्र में भेजता है। उनकी भूमिका स्थानीय संगठन और प्रदेश नेतृत्व के बीच समन्वय की होती है।
प्रवासी कार्यकर्ताओं को मुख्य रूप से ये जिम्मेदारियां दी गई हैं—
बूथ समितियों की सक्रियता की समीक्षा करना।
मंडल और शक्ति केंद्रों की बैठकें आयोजित कराना।
संगठनात्मक कमियों की पहचान करना।
स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ नियमित संवाद करना।
जनप्रतिनिधियों और पार्टी पदाधिकारियों के बीच समन्वय बढ़ाना।
विधानसभा क्षेत्र के राजनीतिक और संगठनात्मक माहौल की रिपोर्ट तैयार करना।
सरकार की योजनाओं और पार्टी की नीतियों को जनता तक पहुंचाने में संगठन की मदद करना।
पंचायत और निकाय चुनावों के दौरान संगठन की सक्रियता का आकलन करना।
बीजेपी के लिए प्रवासी कार्यकर्ताओं का यह मॉडल केवल आगामी पंचायत चुनावों तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इन कार्यकर्ताओं की रिपोर्ट के आधार पर संगठन बूथ स्तर की कमियों, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों का आकलन करेगा।
पार्टी के संगठनात्मक आकलन में पूर्वी राजस्थान और दक्षिणी राजस्थान को अपेक्षाकृत अधिक चुनौतीपूर्ण माना जाता है, जबकि हाड़ौती और मारवाड़ को बीजेपी अपेक्षाकृत मजबूत क्षेत्र मानती है।
ऐसे में 113 विधानसभा क्षेत्रों में प्रवासी कार्यकर्ताओं की तैनाती को बीजेपी की आगामी चुनावी रणनीति के महत्वपूर्ण संगठनात्मक कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
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