BUVM के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता के अनुसार, UPI पर प्रस्तावित MDR के विरोध में बुधवार को करीब 17 राज्यों के व्यापारिक प्रतिनिधियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चर्चा हुई। बैठक में तय कार्यक्रम के तहत 2 अक्टूबर को ‘नो UPI डे’ के साथ आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया गया।
BUVM के मुताबिक, 2 अक्टूबर के बाद 10 अक्टूबर को स्थानीय स्तर पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद 15 अक्टूबर को दोबारा ‘नो UPI डे’ मनाने का कार्यक्रम है। संगठन का कहना है कि यदि प्रस्तावित MDR शुल्क वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को आगे भी जारी रखा जाएगा।
बाबूलाल गुप्ता ने कहा कि UPI पर MDR लागू होने से व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ सकता है। इसी को लेकर व्यापारिक संगठनों की ओर से शुल्क वापस लेने की मांग की जा रही है। व्यापारियों की मांगों को लेकर सांसदों को ज्ञापन देने के साथ प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के समक्ष भी मुद्दा उठाने की बात कही गई है।
2 अक्टूबर को आंदोलन में शामिल दुकानों पर UPI भुगतान स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसे में बाजार जाने वाले ग्राहकों को भुगतान के लिए कैश या कार्ड का विकल्प रखना पड़ सकता है।
हालांकि, इस विरोध का मतलब UPI सेवा का पूरी तरह बंद होना नहीं है। केवल आंदोलन में शामिल व्यापारी और संगठन UPI भुगतान स्वीकार नहीं करने की बात कह रहे हैं।
दूसरी ओर, कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण खंडेलवाल के नेतृत्व में व्यापारिक संगठनों के एक प्रतिनिधिमंडल ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर UPI पर प्रस्तावित MDR को लेकर व्यापारियों की चिंताएं रखीं।
CAIT की ओर से बैठक के बाद वित्त मंत्री द्वारा समस्या के समाधान का आश्वासन मिलने की बात कही गई और संगठन ने ‘नो UPI डे’ का आह्वान वापस लेने की बात कही।
हालांकि, BUVM ने स्पष्ट किया है कि उसके कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ऐसे में BUVM से जुड़े व्यापारिक संगठन 2 अक्टूबर को अपने तय कार्यक्रम के अनुसार ‘नो UPI डे’ मनाने की तैयारी में हैं।
व्यापारिक संगठनों का कहना है कि खुदरा व्यापारी और डिस्ट्रीब्यूटर अक्सर कम मार्जिन पर काम करते हैं। ऐसे में डिजिटल लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क लगने से उनकी लागत बढ़ सकती है। संगठनों का तर्क है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को आसान और सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से बढ़ावा दिया जाना चाहिए और व्यापारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।
संगठनों ने यह भी कहा है कि UPI के बढ़ते इस्तेमाल से कैश लेनदेन में कमी आई है और व्यापारी डिजिटल भुगतान व्यवस्था को अपनाने में सहयोग कर रहे हैं। ऐसे में प्रस्तावित MDR को लेकर वे सरकार से पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं।
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