क्रिटिकल जिलों में पाली, उदयपुर, राजसमंद, जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, बालोतरा, ब्यावर और दौसा शामिल हैं। जबकि सेमी-क्रिटिकल श्रेणी में जयपुर, बीकानेर, चूरू, हनुमानगढ़, जालोर, सीकर, सिरोही, झुंझुनूं, नागौर, कोटपूतली-बहरोड़ और सवाई माधोपुर समेत 22 जिले शामिल हैं। अजमेर, अलवर, भरतपुर और भीलवाड़ा समेत 17 जिलों को फिलहाल रिलेटिवली सेफ श्रेणी में रखा गया है।
चारे की संभावित कमी को देखते हुए राजस्थान सरकार ने पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश से सहयोग मांगा है। पशुपालन विभाग के प्रमुख शासन सचिव ने तीनों राज्यों को पत्र भेजकर चारे की उपलब्धता बढ़ाने का आग्रह किया है। विभागीय टीमें 8 से 10 अक्टूबर तक इन राज्यों का दौरा करेंगी और चारा मंडियों व उत्पादन क्षेत्रों में उपलब्धता तथा सप्लाई चेन की जानकारी लेंगी।
सरकार ने पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने और इसके औद्योगिक इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग भी की है, ताकि अधिक से अधिक पराली को पशु चारे के रूप में उपलब्ध कराया जा सके। साथ ही बिचौलियों द्वारा पराली की कृत्रिम जमाखोरी कर कीमत बढ़ाने पर रोक लगाने की मांग की गई है।
कम बारिश और एल-नीनो के प्रभाव के बीच पानी और चारे की स्थिति पर सरकार की नजर है। अब विभागीय टीमें दूसरे राज्यों से चारे की संभावित आपूर्ति और उपलब्धता का आकलन कर आगे की रणनीति तैयार करेंगी।
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