खसरा नंबर 528 में कथित व्यावसायिक विकास को लेकर शिकायत | भू-रूपांतरण और स्वीकृत ले-आउट प्लान की स्थिति स्पष्ट करने की मांग | क्या निर्माण कार्य की जांच करेगा JDA जोन-10?
जयपुर। राजधानी जयपुर में जमीनों के उपयोग और अनधिकृत निर्माण को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जामडोली क्षेत्र में आगरा रोड स्थित पुरानी चुंगी बस स्टैंड के पास सुमेल रोड पर विकसित की जा रही ‘नीलकंठ मार्केट’ अब जांच की मांग के केंद्र में है। ग्राम जामडोली के खसरा नंबर 528 की भूमि पर कथित रूप से आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियों के बिना व्यावसायिक विकास किए जाने की आशंका जताई गई है। शिकायत में मौके पर गिट्टी की रोड बिछाकर विकास कार्य किए जाने का भी उल्लेख है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि संबंधित भूमि पर व्यावसायिक मार्केट विकसित की जा रही है, तो क्या इसके लिए सभी जरूरी अनुमतियां ली गई हैं? क्या भूमि का नियमानुसार भू-रूपांतरण हुआ है? क्या ले-आउट प्लान स्वीकृत है? या फिर सरकारी रिकॉर्ड की जांच से पहले ही मौके पर विकास कार्य आगे बढ़ रहे हैं?
गिट्टी की रोड बिछी, अब जमीन के कागजों की जांच जरूरी!
किसी भी भूमि पर व्यावसायिक विकास की वैधता केवल मौके पर सड़क या दुकानें दिखाई देने से तय नहीं होती। इसके लिए भूमि का राजस्व रिकॉर्ड, स्वीकृत भू-उपयोग, भू-रूपांतरण आदेश और संबंधित विकास अनुमतियों की जांच जरूरी है।
नीलकंठ मार्केट को लेकर उठे सवालों के बीच अब यह पता लगाना आवश्यक है कि मौके पर बिछाई जा रही गिट्टी की सड़क किस स्वीकृत योजना के तहत तैयार की जा रही है और संबंधित विकास कार्यों के लिए सक्षम प्राधिकारी की अनुमति उपलब्ध है या नहीं।
खसरा नंबर 528 पर किसकी जिम्मेदारी?
इस मामले में JDA जोन-10 के अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि अधिकारी मौके पर पहुंचकर पैमाइश कराएं, निर्माण एवं विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति दर्ज करें और संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन करें।
यदि सभी जरूरी स्वीकृतियां उपलब्ध हैं, तो विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं, यदि जांच में नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो जिम्मेदार पक्ष के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
धारा 90-A और ले-आउट की हकीकत सामने आए
शिकायत में राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम की धारा 90-A के तहत भू-रूपांतरण की स्थिति की जांच कराने के साथ-साथ स्वीकृत ले-आउट प्लान, भवन निर्माण अनुमति और अन्य लागू स्वीकृतियों का सत्यापन कराने की मांग की गई है।
सवाल यह भी है कि क्या संबंधित भूमि पर विकसित की जा रही मार्केट का ले-आउट नियमानुसार अनुमोदित है? क्या सड़क और अन्य सुविधाओं का विकास स्वीकृत योजना के अनुरूप हो रहा है? इन सवालों का जवाब केवल आधिकारिक रिकॉर्ड और स्थल निरीक्षण से ही मिलेगा।
शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई तो कौन देगा जवाब?
शिकायतकर्ता ने JDA से स्थल निरीक्षण, निर्माण कार्य की वैधानिक स्थिति की जांच और कार्रवाई की लिखित जानकारी मांगी है। यदि अनधिकृत विकास प्रमाणित होता है, तो नियमानुसार निर्माण रुकवाने, सील करने, हटाने अथवा अन्य आवश्यक प्रवर्तन कार्रवाई की मांग की गई है।
अब निगाहें JDA जोन-10 पर हैं। क्या विभाग मौके पर पहुंचकर गिट्टी की रोड और अन्य विकास कार्यों की जांच करेगा? क्या भू-रूपांतरण और ले-आउट की स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट होगी? और यदि नियमों का उल्लंघन मिलता है, तो क्या जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी?
फिलहाल, ये सवाल हैं—अंतिम निष्कर्ष नहीं। नीलकंठ मार्केट के संबंध में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और JDA का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। जांच रिपोर्ट ही बताएगी कि संबंधित विकास कार्य नियमानुसार हैं या नहीं।
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